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    हाथ में क्यों बांधा जाता है काला कलावा? पढ़ें 3 गांठों का रहस्य

    Updated: Tue, 09 Jun 2026 12:09 PM (GMT+05:30)

    काला कलावा बांधते समय उसमें लगाई जाने वाली गांठों का विशेष महत्व बताया गया है। आइए जानते हैं इसका महत्व और इसे पहनने के नियम। ...और पढ़ें

    काला कलावा पहनने के नियम (AI-Generated Image)

    काला कलावा पहनने के नियम (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. काला कलावा महाकाल और काल भैरव की कृपा का प्रतीक माना जाता है

    2. इसमें 3, 5 या 7 गांठ लगाने की परंपरा है

    3. बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव की मान्यता जुड़ी है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में कलावा या मौली बांधने की परंपरा बहुत पुरानी है। आमतौर पर पूजा-पाठ, यज्ञ और धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान लाल या पीले रंग का कलावा बांधा जाता है, लेकिन पिछले कुछ समय से काला कलावा भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ है। खासकर, भगवान शिव के भक्तों और काल भैरव की उपासना करने वाले श्रद्धालुओं में इसे पहनने का चलन तेजी से बढ़ा है।

    अगर आपने कभी किसी शिव मंदिर, विशेष रूप से महाकाल या काल भैरव मंदिर के बाहर ध्यान दिया हो, तो वहां काला कलावा बिकता हुआ जरूर दिखाई देगा। कई श्रद्धालु पूजा के बाद इसे अपनी कलाई पर बांधते हैं और इसे ईश्वर की कृपा और सुरक्षा का प्रतीक मानते हैं।

    शिव का प्रतीक है काला कलावा

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काला कलावा भगवान शिव के रौद्र स्वरूप महाकाल और काल भैरव से जुड़ा हुआ माना जाता है। मान्यता है कि इसे धारण करने से व्यक्ति को नकारात्मक प्रभावों से रक्षा मिलती है और मन में साहस तथा आत्मविश्वास का संचार होता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इसे केवल एक धागा नहीं, बल्कि अपनी आस्था का प्रतीक मानकर पहनते हैं।

    क्यों लगाई जाती हैं गांठें?

    काला कलावा बांधते समय उसमें लगाई जाने वाली गांठों का भी विशेष महत्व बताया जाता है। परंपरा के अनुसार इसमें 3, 5 या 7 गांठ लगाई जा सकती हैं, लेकिन तीन गांठ सबसे अधिक प्रचलित मानी जाती है। कई लोग इन तीन गांठों को श्रद्धा, सुरक्षा और शुभता का प्रतीक मानते हैं। यही कारण है कि मंदिरों में पुजारी भी अक्सर तीन गांठ लगाकर ही कलावा बांधते हैं।

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    Kalawa rules

    (AI-Generated Image)

    भारतीय परंपरा में काले रंग को लंबे समय से बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) से बचाव के प्रतीक के रूप में देखा जाता रहा है। इसी वजह से कुछ लोग काला कलावा पहनना शुभ मानते हैं। उनका विश्वास है कि यह आसपास की नकारात्मकता को दूर रखने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है।

    किस दिन धारण करना शुभ?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार, मंगलवार और शनिवार को काला कलावा धारण करना शुभ माना जाता है। विशेष रूप से शिव मंदिर या काल भैरव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद इसे पहनने की परंपरा कई स्थानों पर देखने को मिलती है। हालांकि, इसके लाभों को लेकर कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसे पूरी तरह आस्था और धार्मिक विश्वास से जुड़ा विषय माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।