नकारात्मक ऊर्जा का संकेत या भगवान की कृपा, पूजा करते समय क्यों आती है बार-बार जम्हाई?
पूजा करते समय बार-बार जम्हाई क्यों आती है? आइए इसके पीछे का असली धार्मिक और आध्यात्मिक कारण जानते हैं।

पूजा के दौरान जम्हाई आने का क्या है मतलब?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और भक्ति को अंतरात्मा की शुद्धि का मार्ग माना गया है। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि जब लोग दीपक जलाकर मंत्र जाप या ध्यान करने बैठते हैं, तो उन्हें अचानक बार-बार जम्हाई (उबासी) आने लगती है।
आमतौर पर इसे शारीरिक थकान या आलस मान लिया जाता है, लेकिन शास्त्रों और आध्यात्मिक दृष्टि से इसके पीछे गहरे संकेत छिपे हैं। आइए इसे समझते हैं।
नकारात्मक ऊर्जा का बाहर निकलना
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब हम नियमित रूप से पूजा-पाठ या मंत्रों का जाप करते हैं, तो उस स्थान पर और हमारे भीतर एक तीव्र सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। मनुष्य के शरीर में पहले से मौजूद नकारात्मक विचार, मानसिक तनाव और तामसिक तरंगें इस दिव्य ऊर्जा को सहन नहीं कर पातीं।
जब सकारात्मक ऊर्जा हमारे अंदर प्रवेश करती है, तो वह अंदर दबी हुई नकारात्मकता को बाहर धकेलती है। जम्हाई आना इसी प्रक्रिया का एक संकेत है। सरल शब्दों में कहें तो, शरीर से नकारात्मकता उबासी के रूप में बाहर निकल रही होती है।

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"जंभणे क्षुते चैव प्राणायामं समाचरेत्।"
मन का दोहरी स्थिति में होना
मनुस्मृति के आचार खंड के अनुसार, कई बार हमारा शरीर तो पूजा स्थल पर बैठा होता है, लेकिन मन में दुनिया भर की चिंताएं, कारोबार या परिवार की बातें घूम रही होती हैं और मन पवित्र मंत्रों और बुरे सांसारिक विचारों के बीच झूल रहा होता है, तब भी मन में एक युद्ध यानी लड़ाई सी छिड़ जाती है। इस मानसिक भटकाव और एकाग्रता की कमी की वजह से जम्हाई का अनुभव होता है।
पूजा के दौरान जम्हाई आने पर क्या करें?
- आचमन करें - जम्हाई आने के बाद शुद्धि के लिए आचमन करें या दाहिने कान को छुएं, क्योंकि शास्त्रों में माना गया है कि दाहिने कान में देवताओं का वास होता है और इसके स्पर्श से तुरंत शुद्धि हो जाती है।
- मुंह ढकें - उबासी लेते समय मुंह खुला न रखें, हाथ से ढकें और चुटकी बजाएं।
- गहरी सांसें लें - पूजा के संकल्प से पहले गहरी सांसें लेने से आलस और उबासी दूर रहती है।
- आसन का रखें ध्यान - रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर बैठने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सही तरीके से होता है। इसलिए रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर बैठें।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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