सावन में शादीशुदा बेटियों का मायके आना क्यों शुभ माना जाता है? पढ़ें इस खास परंपरा का महत्व
सावन का महीना विवाहित बेटियों के मायके आने के लिए शुभ माना जाता है, जो पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करता ...और पढ़ें
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सावन के महीने में शादीशुदा बेटियों का मायके आना (Picture Credits- AI Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का पवित्र महीना सिर्फ भगवान शिव की आराधना के लिए ही नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्तों को भी मजबूत करने का सुनहरा समय है। धार्मिक और लोक प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक, सावन के महीने में विवाहित महिलाओं को अपने मायके जरूर जाना चाहिए।
इसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि, ऐसा करने से बेटी का अपने मायके वालों के साथ रिश्ता मधुर होने के साथ और भी मजबूत होता है, जो रिश्ते में सकारात्मक प्रभाव दिखाता है। माना जाता है कि, जिन घरों में आज भी इस परंपरा का पालन किया जाता है, वहां बेटियों का सौभाग्य परिवार की सुख-समृद्धि और उन्नति पर अच्छा असर दिखाता है।
सावन में बेटियों के मायके आने का महत्व
मान्यता है कि, विवाह के बाद शादीशुदा बेटियों को सावन महीने में अपने मायके जरूर आना चाहिए। इससे परिवार के सदस्यों को मानसिक और भावनात्मक सुख मिलता है। अक्सर यह देखने को मिलता है कि, जब किसी की लड़की की शादी हो जाती है, तो उसका मायके काफी सूना हो जाता है।
इसलिए कहा जाता है कि, सावन मास में उसके घर आने से मायके में सुख-समृद्धि और खुशहाली भी बरकरार रहती है। देखा जाए तो इस परंपरा को नव विवाहित बेटियों के लिए बड़ा खास माना जाता है, लेकिन जिन भी महिलाओं की शादी को लंबा समय हो चुका है, वो भी इस परंपरा का पालन कर सकती है।
शादी के बाद पहली बार मायके आई बेटी का स्वागत कैसे करें?
सावन के पवित्र महीने पर बेटी के ससुराल से मायके आने पर उसका स्वागत सादगी और पवित्रता के साथ करें। सबसे पहले दहलीज पर उसकी आरती उतारें।
इसके बाद माथे पर अक्षत,रोली और चंदन का तिलक लगाएं।
एक बड़े से पात्र में उसके पैरों को साफ पानी से धोकर अच्छे से पैर पोंछे।
इसके बाद सावन से जुड़े खास पकवान जैसे, घेवर, खीर, मालपुआ जैसे मिष्ठान खिलाकर उसका मुंह मीठा कराएं।
इसके बाद शादीशुदा बेटी के हाथों से घर में एक तुलसी का पौधा लगवाना शुभ माना जाता है। इसके बाद बेटी को सोलह श्रृंगार का सामान भेंट करें।
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