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    सावन के पवित्र महीने में प्याज, लहसुन और कढ़ी से परहेज की धार्मिक वजह क्या कहती है? नोट करें नियम

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 06:00 PM (IST)

    सावन के पवित्र महीने में प्याज, लहसुन, दही और कढ़ी जैसे खाद्य पदार्थों से परहेज किया जाता है, क्योंकि यह माह शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का समय होता ह ...और पढ़ें

    सावन के महीने में खान-पान से जुड़े अहम नियम (Picture Credits- AI Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना हिंदू पंचांग के सबसे पवित्र महीनों में शामिल है, जो पूरी तरह से भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है। इस पवित्र मास के दौरान भक्त उपवास रखकर भगवान शिव की पूजा, सेवा, जलाभिषेक और संबंधित मंत्रों का जाप करते हैं और सात्विक जीवनशैली को अपनाते हैं। आध्यात्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ कई घरों में प्याज, लहसुन, दही, दूध और कढ़ी जैसे भोजन को ग्रहण करने की मनाही होती है। आइए जानते हैं सावन में इन खाद्य पदार्थों का सेवन क्यों नहीं करना चाहिए?

    हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, सावन का महीना शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि का समय होता है। ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के मुताबिक, इस पवित्र अवधि के दौरान भक्तों को सांसारिक मोह-माया और विकर्षणों से दूर रहकर शिव भक्ति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सावन मास में भोजन का अत्यंत योगदान होता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि, यह विचारों और भावनाओं पर असर डालता है। कहा जाता है कि, सादा सात्विक आहार प्रार्थना और व्रत के दौरान मानसिक स्पष्टता, भावनात्मक संतुलन और एकाग्रता बनाए रखने में मदद करता है।

    सावन में प्याज और लहसुन क्यों परहेज?

    आयुर्वेद और योग दर्शन के अनुसार, प्याज और लहसुन को तामसिक या राजसिक खाद्य पदार्थों में शामिल किया जाता है, जो इंद्रियों को उत्तेजित करने के साथ बेचैनी बढ़ाते हैं और मानसिक शांति कम करते हैं।

    सावन का महीना ध्यान, मंत्र-जाप और आत्म अनुशासन के लिए समर्पित है, इस वजह से भक्तों को तामसिक और राजसिक भोजन पदार्थों की जगह फल, दूध, मेवे और साधारण सब्जियों जैसे सात्विक खाद्य पदार्थों का चयन करना चाहिए। प्याज और लहसुन से परहेज करना विचारों की शुद्धता को बढ़ाने का काम करता है।

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    दही खाना सही या नहीं?

    आयुर्वेद के मुताबिक, सावन का महीना बरसात का महीना होता है, जिस वजह से पाचन क्रिया स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाती है। दही पौष्टिक तो है, लेकिन कुछ लोगों को खासकर रात में या उमस भरे मौसम में यह पेट को भारी करने के साथ बलगम की समस्या को उत्पन्न कर सकता है। सावन का महीना मानसून के दौरान पड़ता है, जिस वजह से कई परिवारों में मौसमी खान-पान की परंपरा के तहत दही खाने से बचा जाता है।

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    कढ़ी के सेवन से जुड़े नियम

    सावन के महीने में कई लोग कढ़ी दही और बेसन से बने खाद्य पदार्थों को खाने से बचते हैं। आध्यात्मिक नजरिए से कई श्रद्धालु सावन व्रत के दौरान खट्टे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करते हैं, जो अनुशासन और सादगी का प्रतीक है। वे भारी भोजन की बजाय साबूदाना, उबले आलू, फल, दूध और मक्खन जैसे हल्के व्यंजन को करना पसंद करते हैं।

    भारत में हर परिवार सावन की परंपराओं को अपने-अपने तरीके से निभाता है और अलग-अलग हिस्सों में ये रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं। जहां कुछ लोग सावन भर प्याज, लहसुन, दही, कढ़ी और मांस-मछली के सेवन से बचते हैं, वहीं कुछ लोग सिर्फ सोमवार या खास व्रत में ही ऐसा करते हैं। सावन का गहरा संदेश पवित्रता, कृतज्ञता और अनुशासन के साथ जीवन जीना है। सोच-समझकर खान-पान और भगवान शिव के प्रति सच्ची श्रद्धा के साथ ये परंपराएं पीढ़ियों से आध्यात्मिक और शारीरिक सेहत के लिए प्रेरणा देती आ रही हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।