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'पार्थिव शिवलिंग' पूजा का क्या है महत्व? सावन में इस शिव साधना से जुड़े हैं कई रहस्य

Published: Sat, 25 Jul 2026 03:26 PM (IST)

सावन में पार्थिव शिवलिंग पूजा क्यों खास है? इस शिव साधना से जुड़े हैं कई रहस्य। जानिए पार्थिव शिवलिंग बनाने, ...और पढ़ें

ऐसे  प्राप्त करें शिव का आशीर्वाद । (Picture Credit- AI Generated)

ऐसे प्राप्त करें शिव का आशीर्वाद । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू संस्कृति में सावन के महीने को भगवान शिव की आराधना करने के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। वहीं शिव जी की पूजा का सबसे अच्छा माध्यम पार्थिव शिवलिंग है। पार्थिव यानी पृथ्वी से बना हुआ, मतलब मिट्टी से बने हुए शिवलिंग की पूजा को सावन में सबसे अच्छा माना जाता है।

शिव पुराण में पार्थिव शिवलिंग पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और अकाल मृत्यु का भय खत्म हो जाता है। पार्थिव शिवलिंग पूजा का महत्व यहीं खत्म नहीं होता है, बल्कि इसके और भी लाभ हैं। चलिए जानते हैं इस शिवलिंग से जुड़े कुछ रोचक रहस्य।

पार्थिव शिवलिंग पूजा का धार्मिक महत्व

पार्थिव शिवलिंग पूजा में मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण किया जाता है, यह मिट्टी किसी पवित्र नदी के किनारे की होती है। इससे शिवलिंग तैयार कर और विधि-विधान से उनका पूजन करना चाहिए। कहा जाता है कि जो व्यक्ति सावन के महीने में श्रद्धापूर्वक पार्थिव शिवलिंग का पूजन करता है, उसे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

पार्थिव पूजा से जुड़ी धार्मिक कथाएं

धार्मिक ग्रंथों में पार्थिव शिवलिंग पूजा से जुड़ी कई कथाएं मिलती हैं। रामायण से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले भगवान श्रीराम ने समुद्र तट पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा की थी। ऐसा माना जाता है कि इस पूजा के माध्यम से उन्होंने शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।

पार्थिव शिवलिंग पूजा के नियम और सावधानियां

  • पार्थिव शिवलिंग पूजा करते समय कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना गया है।
  • शिवलिंग बनाने के लिए पवित्र स्थान की शुद्ध मिट्टी का उपयोग करना चाहिए।
  • मिट्टी में गंगाजल, गाय का दूध, गोबर, गुड़ और भस्म मिलाकर शिवलिंग बनाएं।
  • शिवलिंग का आकार सामान्य रूप से अंगूठे के बराबर तक का होना ही चाहिए।
  • पूजा और आरती के बाद पार्थिव शिवलिंग का उसी दिन जल में विसर्जन कर देना चाहिए।

मिट्टी के शिवलिंग नहीं हैं, तो करें यह काम

किसी शिवलिंग पर चंदन की तीन रेखाओं को खींचना त्रिपुंड कहलाता है, मगर जब खाली तीन रेखाएं खींची जाती हैं, तो इसे पार्थिव शिवलिंग की पूजा मान लिया जाता है। शिव पुराण के पार्वती खंड में पार्थिव शिवलिंग बनाने की यह सबसे आसान विधि बताई गई है।

अतः सावन में भक्त अपनी श्रद्धा और विश्वास के अनुसार पार्थिव शिवलिंग की पूजा कर सकते हैं। इससे उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में शांति रहती है।

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