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    भंडारे का प्रसाद ग्रहण करना सही है? जानें शास्त्रों के नियम और इसके पीछे का धार्मिक तर्क

    Updated: Thu, 15 Jan 2026 08:30 PM (IST)

    आपने सुना होगा कि भंडारे का प्रसाद किस्मत से मिलता है। लेकिन, क्या हर किसी को भंडारे का भोजन करना चाहिए? जानें शास्त्रों के अनुसार, भंडारा खाने के निय ...और पढ़ें

    क्या आप सोच-समझकर खाते हैं भंडारा? (Image Source: AI-Generated)

    क्या आप सोच-समझकर खाते हैं भंडारा? (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मंदिर के बाहर या किसी धार्मिक आयोजन पर होने वाले 'भंडारे' का नाम सुनते ही श्रद्धा और स्वाद दोनों याद आते हैं। हम अक्सर बिना सोचे-समझे भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में भंडारा खाने के भी कुछ विशेष नियम बताए गए हैं?

    अंकशास्त्र और शास्त्रों की मान्यताओं के अनुसार, भंडारा केवल पेट भरने का जरिया नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक क्रिया है। आइए जानते हैं कि किन परिस्थितियों में भंडारा खाना पुण्य देता है और कब यह आपके लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

    भंडारा खाने के नियम: क्या कहता है शास्त्र?

    1. सक्षम लोगों के लिए निषेध

    शास्त्रों के अनुसार, भंडारा विशेष रूप से उन लोगों के लिए होता है जो जरूरतमंद हैं या जो भोजन जुटाने में असमर्थ हैं। अगर आप आर्थिक रूप से संपन्न हैं और केवल 'मुफ्त' के लालच में भंडारा खाते हैं, तो यह आपके पुण्य कर्मों को कम कर सकता है।

    2. सेवा और दान का महत्व

    अगर आप भंडारे का भोजन कर रहे हैं, तो यह जरूरी है कि आप वहां किसी न किसी रूप में सेवा दें या अपनी क्षमता के अनुसार दान करें। शास्त्रों में उल्लेख है कि बिना कुछ योगदान दिए दूसरों के हिस्से का अन्न खाना 'ऋण' (कर्ज) चढ़ने जैसा है।

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    3. लालच से बचें

    भंडारा 'प्रसाद' के रूप में ग्रहण करना चाहिए, न कि भरपेट दावत की तरह। प्रसाद की एक पूरी या एक चम्मच खीर भी पर्याप्त है। जो लोग भंडारे के भोजन को बर्बाद करते हैं या जरूरत से ज्यादा लेकर फेंकते हैं, उन्हें अन्न के अपमान का दोष लगता है।

    किन लोगों को भंडारा नहीं खाना चाहिए?

    धनवान व्यक्ति: जो लोग स्वयं समर्थ हैं, उन्हें भंडारे की कतार में लगकर किसी गरीब का हक नहीं मारना चाहिए।

    बदले की भावना वाले: यदि आप भंडारे के आयोजक को नीचा दिखाने या केवल स्वाद की आलोचना करने के लिए भोजन कर रहे हैं, तो इससे बचना चाहिए।

    बिना श्रद्धा वाले: यदि मन में भक्ति भाव नहीं है, तो वह भोजन शरीर को पोषण देने के बजाय नकारात्मकता पैदा कर सकता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।