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    मकर संक्रांति पर स्नान न करने वालों के लिए क्या कहता है शास्त्र? कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये भूल

    Updated: Thu, 15 Jan 2026 05:31 PM (GMT+05:30)

    मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान का विशेष महत्व है। इस दिन जो स्नान नहीं करता उसके लिए शास्त्रों में क्या लिखा है आइए जानते हैं। जानें इसके पीछे के धार्म ...और पढ़ें

    आपने किया है मकर संक्रांति पर स्नान? (Image Source: AI-Generated)

    आपने किया है मकर संक्रांति पर स्नान? (Image Source: AI-Generated)

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    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। मकर संक्रांति का त्योहार भारतीय संस्कृति में केवल एक पर्व नहीं, बल्कि शुद्धिकरण और नई ऊर्जा के संचार का प्रतीक है। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे 'सूर्य उत्तरायण' कहा जाता है। शास्त्रों में इस खास दिन पर पवित्र नदी में स्नान और दान का अत्यधिक महत्व बताया गया है।

    लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि मकर संक्रांति पर स्नान करना अनिवार्य क्यों माना गया है? या, पवित्र स्नान के अलावा अगर आप घर में स्नान नहीं करते और बिना नहाए खाना खा लेते हैं तो क्या होता है। अगर कोई इस दिन स्नान नहीं करता, तो शास्त्रों में उसके बारे में क्या कहा गया है, आइए जानते हैं। साथ ही, इस परंपरा के पीछे के धार्मिक और व्यावहारिक पहलू के बारे में भी आपको बताते हैं।

    मकर संक्रांति पर स्नान का महत्व

    हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन किया गया स्नान (Makar Sankranti Holy Snan) सात जन्मों के पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। इस दिन सूर्य की किरणें विशेष रूप से सकारात्मक ऊर्जा बिखेरती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन राजा भगीरथ के पीछे-पीछे मां गंगा कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए गंगा सागर में जाकर मिली थीं। इसलिए, इस दिन गंगा स्नान (Ganga Snan) या किसी भी पवित्र जलाशय में स्नान करने से 'अक्षय पुण्य' की प्राप्ति होती है।

    Makar Sankranti Snan

    (Image Source: AI-Generated)

    स्नान न करने पर क्या कहते हैं शास्त्र?

    मकर संक्रांति पर स्नान को लेकर शास्त्रों में कुछ सख्त बातें भी कही गई हैं:

    आलस्य और दरिद्रता: मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति बिना किसी वैध कारण (जैसे बीमारी) के इस दिन स्नान नहीं करता, वह पूरे वर्ष मानसिक रूप से सुस्त और शारीरिक रूप से अशुद्ध महसूस कर सकता है। इसे अनुशासनहीनता का प्रतीक माना जाता है।

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    धार्मिक मान्यता: कुछ ग्रंथों में प्रतीकात्मक रूप से कहा गया है कि जो लोग इस दिन पवित्र स्नान से बचते हैं, वे अगले जन्म में 'रोगी' या 'निर्धन' हो सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि व्यक्ति अपनी आध्यात्मिक उन्नति का अवसर खो देता है।

    नकारात्मक ऊर्जा: मकर संक्रांति संक्रमण का काल है। इस समय प्रकृति बदलती है। जो लोग स्नान और शुद्धि की प्रक्रिया नहीं अपनाते, वे पुरानी नकारात्मक ऊर्जा को ही ढोते रहते हैं।

    किन लोगों को है छूट?

    शास्त्र बहुत उदार भी हैं। अगर कोई व्यक्ति बहुत बीमार है, बुजुर्ग है या बहुत छोटा बच्चा है, तो उनके लिए नियमों में लचीलापन है। ऐसे लोग, घर पर ही गुनगुने पानी में थोड़ा सा गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। अगर पानी से स्नान संभव न हो, तो केवल मंत्रोच्चार और मार्जन (हल्का जल छिड़कना) से भी शुद्धि मानी जाती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।