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    Makar Sankranti 2026: अगले 54 साल तक 15 जनवरी को ही होगी संक्रांति, 2080 के बाद बदल जाएगी एक और तारीख!

    Updated: Thu, 15 Jan 2026 09:21 AM (GMT+05:30)

    क्या आप जानते हैं कि मकर संक्रांति अब 15 जनवरी को क्यों मनाई जाती है? पृथ्वी के अपनी धुरी पर झुकने और सूर्य के मकर राशि में प्रवेश की बदलती टाइमिंग के ...और पढ़ें

    क्यों हो रहा मकर संक्रांति की तारीख में बदलाव? (Image Source: AI-Generated)

    क्यों हो रहा मकर संक्रांति की तारीख में बदलाव? (Image Source: AI-Generated)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारत में त्योहारों की तिथियां अक्सर बदलती रहती हैं, लेकिन मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व था जिसे हम बचपन से 14 जनवरी को ही मनाते आए हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब यह त्योहार अक्सर 15 जनवरी को मनाया जाने लगा है। ज्योतिषियों और खगोल शास्त्रियों की मानें तो अगले 54 सालों तक मकर संक्रांति ज्यादातर 15 जनवरी को ही पड़ेगी। आइए समझते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है।

    क्या है 'संक्रांति' का गणित?

    मकर संक्रांति वह समय है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से सूर्य का 'उत्तरायण' सफर शुरू होता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, सूर्य देव के राशि परिवर्तन में हर साल 20 मिनट का अंतर होता है। इस तरह अगले तीन साल में सूर्य देव के राशि परिवर्तन पर 1 घंटे का अंतर हो जाता है। ज्योतिष गणना से इस प्रकार 72 साल में संक्रांति तिथि पर एक दिन का अंतर हो जाता है। इसके लिए 72 वर्षों के बाद संक्रांति तिथि एक दिन आगे खिसक जाती है।

    72 साल में एक दिन का अंतर

    वैज्ञानिक गणना बताती है कि सूर्य की गति में आने वाले इस सूक्ष्म बदलाव के कारण हर 72 सालों में संक्रांति की तिथि एक दिन आगे बढ़ जाती है। पुराने समय की बात करें तो भक्ति काल या उससे पहले यह त्योहार 10 से 12 जनवरी के आसपास मनाया जाता था। फिर एक लंबा दौर आया जब यह 14 जनवरी को स्थिर हो गया। अब खगोलीय बदलावों के कारण यह 15 जनवरी की ओर खिसक रहा है।

    अगले 54 सालों का भविष्य

    ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, साल 2080 के बाद मकर संक्रांति की तिथि 16 जनवरी हो जाएगी। यह बदलाव इतना धीमा है कि हमें महसूस नहीं होता, लेकिन ब्रह्मांड के कैलेंडर में यह एक बड़ी घटना है। लीप ईयर (Leap Year) भी इस तिथि को प्रभावित करता है। जिससे कभी यह 14 तो कभी 15 तारीख को आती है, लेकिन अब 15 जनवरी का पलड़ा भारी रहने वाला है।

    खबरें और भी

    जब 12 जनवरी 1863 में स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था, उस दिन मकर संक्रांति का पर्व था। इस साल वृद्धि योग के साथ-साथ कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि, ज्येष्ठा नक्षत्र और गुरुवार का शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन शुभ योगों के कारण इस दिन किसी भी सामान्य नदी में किया गया स्नान भी गंगा स्नान के समान ही अक्षय पुण्य फल प्रदान करने वाला होगा।

    धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

    भले ही तारीख बदल रही हो, लेकिन इस पर्व का आध्यात्मिक महत्व वही है। सूर्य का उत्तर की ओर बढ़ना प्रकाश और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन दान-पुण्य और पवित्र नदियों में स्नान करने से ऊर्जा का संचार होता है।

    makar sankranti 2026

    (Image Source: Freepik)

    राशि के अनुसार जानते हैं कि आपको इस दिन क्या दान करने चाहिए-

    मेष (Aries): इस राशि के जातकों को ऊर्जा और साहस के लिए लाल मिर्च, लाल कपड़े और मसूर की दाल का दान करना चाहिए।

    वृषभ (Taurus): सुख-समृद्धि के लिए सफेद तिल के लड्डू, चावल और चीनी का दान करना उत्तम रहेगा।

    मिथुन (Gemini): आपको हरी सब्जियां, ताजे मौसमी फल और साबुत मूंग का दान करना चाहिए।

    कर्क (Cancer): मानसिक शांति के लिए सफेद वस्त्र और शुद्ध घी जरूरतमंदों को भेंट करें।

    सिंह (Leo): आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए गुड़, चिक्की, शहद और मूंगफली का दान करें।

    कन्या (Virgo): पुण्य लाभ के लिए मूंग दाल की खिचड़ी बनाकर गरीबों को खिलाएं।

    तुला (Libra): जीवन में संतुलन के लिए मखाना, चावल, चीनी और सफेद वस्त्रों का दान करें।

    वृश्चिक (Scorpio): इस राशि वालों को गुड़, मूंगफली और लाल रंग के गर्म कपड़ों का दान करना चाहिए।

    धनु (Sagittarius): ज्ञान और सौभाग्य के लिए पीले वस्त्र, चने की दाल, बेसन और केले दान करें।

    मकर (Capricorn): शनि देव की कृपा के लिए काले तिल के लड्डू और ऊनी कंबल का दान करें।

    कुंभ (Aquarius): बाधाओं को दूर करने के लिए सरसों का तेल, जूते-चप्पल और गर्म कपड़ों का दान करें।

    मीन (Pisces): सुख-शांति के लिए पीली सरसों, चने की दाल और मौसमी फलों का दान करना शुभ होगा।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।