साल के दूसरे सूर्य ग्रहण की तारीख पक्की, क्या भारत में दिखेगा यह खगोलीय नजारा?
साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगने वाला है। क्या यह भारत में दिखाई देगा? जानिए सूतक काल, समय और धार्मिक महत्व से जुड़ी पूरी जानकारी। ...और पढ़ें

क्या भारत में दिखाई देगा दूसरा सूर्य ग्रहण?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रहण का विशेष महत्व होता है। ग्रहण से 12 घंटे पहले से सूतक काल की शुरुआत हो जाती है। साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर यह ग्रहण लगने जा रहा है। इसी दिन 'हरियाली अमावस्या' मनाई जाएगी, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
कब लगेगा दूसरा सूर्य ग्रहण 2026?
पंचांग के अनुसार, सूर्या ग्रहण की तारीख क्या है और क्या ये भारत में दिखेगा यहां जाने-
- सूर्य ग्रहण 12 अगस्त से शुरू होगा।
- ग्रहण 13 अगस्त 2026 को खत्म होगा।
- यह एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण होगा।
- ग्रहण कर्क राशि में घटित होगा।
- इस दौरान आश्लेषा नक्षत्र का प्रभाव रहेगा।
क्या भारत में दिखेगा ग्रहण और सूतक?
यह सूर्य ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब कोई ग्रहण किसी देश में दिखाई नहीं देता, तो वहां उसका 'सूतक काल' भी मान्य नहीं होता। यही कारण है कि, भारत में रहने वाले लोगों को सूतक के नियमों का पालन करने की कोई भी जरूरत नहीं है।
ग्रहण के दौरान करें ये विशेष काम
- ग्रहण शुरू होने से पहले और खत्म होने के बाद स्नान का विशेष महत्व है।
- इस दौरान जितना हो सके मौन धारण करें, ताकि आपकी ऊर्जा बनी रहे।
- ग्रहण के बाद अपने सामर्थ्य के अनुसार अनाज, तिल या कपड़ो का दान करने से पुण्य मिलता है।
सूर्य ग्रहण में क्या न करें?
- इस दौरान बाहर निकलने और नुकीली चीजों के इस्तेमाल से बचें।
- ग्रहण के बाद अनाज, तिल और गुड़ का दान करना शुभ माना जाता है।
- इस दौरान अर्घ्य न दें, लेकिन मन ही मन 'ॐ सूर्याय नमः' का जप करना बहुत फलदायी होता है।
- ग्रहण से पहले ही खाने-पीने की चीजों में तुलसी दल डाल दें।
इन चीजों की भी होती है मनाही
- तेल मालिश करना
- जल ग्रहण करना
- मल-मूत्र विसर्जन
- बालों में कंघा करना
- मंजन-दातुन करना
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।