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    क्या आपके घर में भी हुआ है बच्चे का जन्म? तो सूतक के इन नियमों को न करें अनदेखा

    By Suman SainiEdited By: Suman Saini
    Updated: Thu, 26 Mar 2026 12:30 PM (IST)

    बच्चे के जन्म के बाद लगने वाले सूतक (Sutak ke Niyam) का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है। ...और पढ़ें

    सूतक के जरूरी नियम (AI Generated Image)

    सूतक के जरूरी नियम (AI Generated Image)

    HighLights

    1. घर में बच्चे के जन्म के बाद लगता है सूतक

    2. 10-15 दिनों तक चलती है सूतक की अवधि

    3. इस दौरान धार्मिक कार्य और बाहरी संपर्क से बचें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, घर में बच्चे का जन्म होने पर सूतक लग जाते हैं, जिसे सोबड़ भी कहा जाता है। यह अवधि 10 से 15 दिनों (या सवा माह) तक चलती है। इसके बाद हवन और पूजा की जाती है, जिसके बाद ही घर और शरीर की शुद्धि मानी जाती है। इस दौरान कई तरह के नियमों का ध्यान रखा जाता है, जिसके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं।

    क्यों लगता है सूतक

    आध्यात्मिक दृष्टि से बच्चे के जन्म के दौरान शरीर से निकलने वाले रक्त आदि के कारण घर के वातावरण को अशुद्ध माना जाता है। सूतक के 10 दिन पूरे होने के बाद विशेष स्नान और हवन किया जाता है, जिससे घर की शुद्धि की जाती है। इसे “सूतक शुद्धि” कहते हैं। इसके बाद ही धार्मिक कार्य और सामान्य दिनचर्या दोबारा शुरू होती है।

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    (Picture Credit: Freepik)

    क्या है सूतक का महत्व

    सूतक का संबंध जन्म-मरण के कारण हुई अशुद्धि से है। घर में बच्चे का जन्म लेना किसी उत्सव के कम नहीं है, लेकिन इसके बाद सूतक के नियमों का भी विशेष रूप से पालन करना जरूरी है। वहीं गरुड़ पुराण के अनुसार, परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु होने पर जो सूतक लगता है उसे 'पातक' कहते हैं।

    बच्चे के जन्म के बाद सूतक लगने के पीछे वैज्ञानिक और स्वास्थ्य कारण भी मौजूद हैं। यह नवजात शिशु और मां को संक्रमण से बचाने, उन्हें आराम देने और घर के वातावरण को शांत बनाए रखने के लिए बाहरी लोगों से अलग रहने की परंपरा है।

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    (AI Generated Image)

    ध्यान रखें ये बातें

    • नवजात शिशु को घर से बाहर नहीं निकालना चाहिए।
    • इस दौरान मंदिर जाने, यज्ञ, घर में पूजा-पाठ करने और शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।
    • घर के सदस्यों को भी बेवजह बाहर जाने से बचना चाहिए।
    • इस दौरान बाहरी व्यक्तियों का घर में आना भी शुभ नहीं माना जाता।
    • इस दौरान भगवान का ध्यान या नाम जप करना चाहिए।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।