त्रिदेवों का वास या ब्रह्मांड का रहस्य? आखिर हर पूजा में क्यों जरूरी है कलश स्थापना
सनातन धर्म में कलश स्थापना का विशेष महत्व है, जिसे देवी-देवताओं की शक्ति और ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है। ...और पढ़ें

क्यों जरूरी है कलश स्थापना? (Picture Credit: AI Generated)
HighLights
कलश में त्रिदेवों (विष्णु, शिव, ब्रह्मा) का वास होता है।
यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाता है।
समुद्र मंथन से अमृत कलश का संबंध है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में पूजा-अर्चना को विधिपूर्वक किया जाता है। इसमें कई चीजों को शामिल किया जाता है, जिससे साधक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। कोई भी पूजा, अनुष्ठान, या मांगलिक कार्य के दौरान कलश स्थापना करने का अधिक महत्व है।
कलश स्थापना न करने से पूजा, अनुष्ठान, या मांगलिक कार्य अधूरा माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, हिंदू धर्म में कलश को देवी-देवताओं की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि पूजा, अनुष्ठान, या मांगलिक कार्य में कलश स्थापना क्यों की जाती है। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि इसके पीछे की वजह के बारे में।
क्या है कलश स्थापना की वजह
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कलश के ऊपरी हिस्से में भगवान विष्णु, कलश के मध्य भाग में भगवान शिव और सबसे नीचे के हिस्से में भगवान ब्रह्मा का वास होता है। साथ ही पवित्र नदियों का जल शामिल किया जाता है। शास्त्रों में बताया गया है कि पूजा-पाठ के दौरान कलश की स्थापना करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। साथ ही सुख और समृद्धि में अपार वृद्धि होती है। कलश का आकार पृथ्वी या ब्रह्मांड का प्रतीक माना जाता है।

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इन बातों का रखें ध्यान
- कलश स्थापना करते समय ध्यान रखें कि कलश टुटा हुआ या फिर चटका हुआ नहीं होना चाहिए। इस तरह के कलश को स्थापना करने से शुभ फल प्राप्त नहीं होता।
- कलश में पवित्र नदियों का जल भरा जाता है। इस दौरान मंत्रों का जप भी किया जाता है। जहां पर कलश स्थापित किया जाता है। वह स्थान पवित्र हो जाता है।
- कलश के ऊपर आम के पत्ते जरूर रखने चाहिए। इसके ऊपर लाल चुनरी में नारियल को लपेटकर रखें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- कलश के ऊपरी हिस्से में कलावा जरूर बांधना चाहिए।
समुद्र मंथन से जुड़ा इतिहास
पौराणिक कथा के अनुसार, जब अमृत प्राप्ति के लिए देवता और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था, तो उस दौरान अमृत से भरा कलश प्रकट हुआ था। इसी वजह से हिंदू धर्म में कलश को सुख, शांति, और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है। इसे पूजा-पाठ या मांगलिक काम के दौरान स्थापित किया जाता है। इससे घर में सकारात्मकता बन रही रहती है।
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