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ऋषि दुर्वासा का श्राप और समुद्र मंथन: पढ़ें मां लक्ष्मी के प्रकट होने की अद्भुत कथा

Published: Tue, 14 Jul 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

यह लेख मां लक्ष्मी की उत्पत्ति की पौराणिक कथा बताता है, जिसमें ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण इंद्र के ...और पढ़ें

मां लक्ष्मी जी के जन्म की कथा (Picture Credit: AI Generated)

मां लक्ष्मी जी के जन्म की कथा (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. ऋषि दुर्वासा के श्राप से इंद्र हुए श्रीविहीन

  2. भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन का दिया सुझाव

  3. समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी कमल पर प्रकट हुईं

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिस पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, उसे जीवन में धन की कमी नहीं होती। वहीं, मां लक्ष्मी के नाराज होने पर आर्थिक तंगी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना जरूर करनी चाहिए, जिससे धन लाभ के योग बनते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैसे प्रकट हुईं मां लक्ष्मी? अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए आपको बताते हैं मां लक्ष्मी के अवतरण से जुड़ी कथा के बारे में।

कैसे प्रकट हुईं मां लक्ष्मी?

पौरणिक कथा के अनुसार, एक बार ऋषि दुर्वासा भगवान शिव के दर्शन के लिए जा रहे रहे। इस दौरान ऋषि दुर्वासा ने नरेश इंद्र से मुलाकात की और उन्हें शिष्टाचार पूर्वक प्रणाम किया। ऋषि दुर्वासा के इस व्यवहार से नरेश इंद्र प्रसन्न हुए और उन्होंने प्रसन्न होने की वजह भगवान विष्णु के द्वारा दिए गए फूल को इंद्र देव को दे दिए।

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ऋषि दुर्वासा के फूल को नरेश इंद्र ने ऐरावत के मस्तक पर साज दिया। फूल की मदद से ऐरावत अधिक तेजस्वी हो गया। नरेश इंद्र का यह व्यवहार ऋषि दुर्वासा को अच्छा नहीं लगा, जिसकी वजह से उन्हें क्रोध आया। ऋषि दुर्वासा ने इंद्र को श्रीविहीन होने का श्राप दे दिया। श्राप के कारण इंद्र का ऐश्वर्य खो गया। स्वर्ग पर दैत्यों ने अत्याचार करने लगे। दैत्यों और देवताओं के बीच युद्ध हुआ, जिसमें देवताओं ने विजयी हासिल किया।

इंद्र देवताओं के साथ ब्रह्मा जी की शरण में पहुंचे। वहां उन्होंने दैत्यों के बारे में बताया। इसके बाद ब्रह्मा जी ने देवताओं को भगवान विष्णु के पास जाने की राय दी। भगवान विष्णु को पहले इस इस बात की जानकारी थी कि ऋषि दुर्वासा के श्राप की वजह से स्वर्ग लोक में लक्ष्मी विहीन हो गई। ऐसी में स्थिति में भगवना विष्णु ने समुद्र मंथन करने की सलाह दी। इसके बाद दैत्यों और देवताओं ने मिलाकर समुद्र मंथन किया।

समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों समेत मां लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब समुद्र से मां लक्ष्मी प्रकट हुईं, तो वे कमल के आसन पर विराजमान थीं। उनका रूप अत्यंत दिव्य, कांतिमय और अलौकिक था। इन्हीं रत्नों में अमृत कलश भी प्राप्त हुआ था। इस अमृत को पीने से देवता अमर हो गए। वहीं, देवताओं और दानवों के बीच युद्ध हुआ। इस दौरान दानवों को हार का सामना करना पड़ा।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।

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