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ब्रह्मांड के पहले 'जर्नलिस्ट' नारद मुनि से जुड़े 5 रोचक तथ्य, जो आपको हैरान कर देंगे!

Published: Sun, 14 Jun 2026 06:30 PM (IST)

देवर्षि नारद मुनि भगवान विष्णु के परम भक्त और ब्रह्मा के मानस पुत्र हैं, जिन्हें संसार का पहला पत्रकार भी माना जाता है। जानते हैं उनसे जुड़े 5 रोचक तथ्य?

नारद मुनि से जुड़े पांच रोचक तथ्य (AI-Generated Image)

नारद मुनि से जुड़े पांच रोचक तथ्य (AI-Generated Image)

HighLights

  1. नारद मुनि को देवर्षि की उपाधि प्राप्त है, वे महान तपस्वी हैं।

  2. भगवान विष्णु के परम भक्त और तीनों लोकों के देवदूत हैं।

  3. 64 विद्याओं के ज्ञाता और 12 चिरंजीवियों में से एक हैं।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान विष्णु के परम भक्त और ब्रह्मा जी के मानस पुत्र नारद मुनि, जिन्हें देवर्षि भी कहा जाता है। पौराणिक ग्रंथों और पुराणों में इनका उल्लेख सपष्ट रूप से किया गया है। वे भजन-कीर्तन, कथा वाचन और ईश्वर के प्रति भक्ति का प्रचार-प्रसार के लिए जाने जाते हैं।

हाथों में वीणा और मुख पर 'नारायण- नारायण' का जाप करते हुए, वे तीनों लोकों भ्रमण कर देवता का संदेश पहुंचाते हैं। मान्यताओं के मुताबिक नारद मुनि संसार के पहले पत्रकार थे। आइए जानते हैं नारद मुनि से जुड़े 5 रोचक तथ्यों के बारे में।

नारद मुनि हैं देवर्षि

पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, नारद मुनि को देवर्षि की उपाधि मिली है। यह एक खास ऋषि पद है, जो सिर्फ दिव्य गुणों और तप के बल पर प्राप्त होता है। वे न सिर्फ तपस्वी है, बल्कि संगीत, ज्ञान और भक्ति के भी महान प्रचारक हैं।

भगवान विष्णु के परम भक्तों में शामिल

भगवान विष्णु के अनन्य भक्तों में नारद मुनि सर्वप्रथम माने जाते हैं। वे जहां भी जाते हैं, नारायण-नारायण का जाप और उनकी भक्ति का प्रचार करते हैं।

नारद मुनि से जुड़े पांच रोचक तथ्य

नारद मुनि से जुड़े पांच रोचक तथ्य (AI-Generated Image)

तीनों लोकों के देवदूत

नारद मुनि तीनों लोकों में संचार करते हैं, मतलब वे स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल तीनों लोकों में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। वे देवताओं और असुरों के बीच बातचीत का माध्यम बने रहते हैं।

64 विद्याओं के ज्ञाता

माना जाता है कि, नारद मुनि 64 विद्याओं में निपूर्ण हैं। उनकी बौद्धिक क्षमता ने उन्हें मुश्किल विचारों को इस तरह संचारित किया, कि हर कोई उन्हें आसानी से समझ सके। हिंदू पौराणिक कथाओं में उन्हें एक महान व्यक्तित्व की उपाधि मिली है।

12 चिरंजीवियों में शामिल

12 चिरंजीवियों में से एक नारद मुनि को भी माना जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, वे आज भी संसार में विद्यमान हैं और हम मनुष्यों के बीच विचरण कर रहे हैं और एक दिव्य संदेशवाहक के रूप में अपना काम कर रहे हैं।

इसके अलावा अपने असाधारण ज्ञान, दिव्य संबंधों और पौराणिक घटनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका के साथ नारद मुनि वैदिक परंपरा में सबसे सम्मान और निष्ठावान व्यक्ति हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।

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