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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 30, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Utpanna Ekadashi 2023: इस दिन है कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी? जानें तिथि और धार्मिक महत्व

    By Vaishnavi DwivediEdited By: Vaishnavi Dwivedi
    Updated: Thu, 30 Nov 2023 11:15 AM (IST)

    Utpanna Ekadashi 2023 हिंदू धर्म में उत्पन्ना एकादशी का बड़ा ही धार्मिक महत्व है। इस शुभ दिन पर लोग सच्ची श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा करते हैं ...और पढ़ें

    Utpanna Ekadashi 2023: कृष्ण पक्ष - उत्पन्ना एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त
    Utpanna Ekadashi 2023: कृष्ण पक्ष - उत्पन्ना एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त

    HighLights

    1. सनातन धर्म में उत्पन्ना एकादशी का बड़ा ही खास महत्व है।
    2. एकादशी पर साधक भक्ति और समर्पण के साथ भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।
    3. साल में कुल 24 एकादशियां पड़ती हैं।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली।Utpanna Ekadashi 2023: श्रीकृष्ण का प्रिय महीना मार्गशीर्ष की शुरुआत हो चुकी है, जो 26 दिसंबर 2023 तक रहेगा। इस दौरान भगवान कृष्ण की पूजा का विधान है। ऐसे में मार्गशीर्ष महीना है, तो एकादशी व्रत का महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है। इस शुभ दिन पर लोग व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु और कृष्ण की पूजा करते हैं। एकादशी प्रति माह दो बार आती है।

    एक शुक्ल पक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष। साल में कुल 24 एकादशियां पड़ती हैं। 8 दिसंबर को कृष्ण पक्ष उत्पन्ना एकादशी मनाई जाएगी, जो शास्त्रों में बेहद शुभ मानी गई है।

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    कृष्ण पक्ष - उत्पन्ना एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त

    एकादशी तिथि आरंभ - 8 दिसंबर 2023 - 05:06

    एकादशी तिथि समापन - 9 दिसंबर 2023 - 06:31

    पारण का शुभ समय - 10 दिसंबर 2023 - सुबह 06:10 बजे से प्रातः 07:13 बजे तक

    उत्पन्ना एकादशी का महत्व

    सनातन धर्म में उत्पन्ना एकादशी का बड़ा ही खास महत्व है। इस दिन पर साधक भक्ति और समर्पण के साथ भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। ऐसा माना जाता है, जो लोग इस दिन पूरे मन से व्रत करते हैं, उनके सभी कष्टों और समस्याओं का अंत हो जाता है और भगवान विष्णु उन्हें वैकुंठ धाम में स्थान देते हैं।

    भगवान विष्णु इस ब्रह्मांड के पालनहार हैं और वो अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और फिर शाम को फल या दूध से बना प्रसाद ग्रहण करते हैं। साथ ही व्रत का पारण भगवान विष्णु के भोग से करते हैं।

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