17 अप्रैल को है साल की सबसे बड़ी अमावस्या, पितृ दोष से मुक्ति के लिए बस कर लें ये 4 काम
वैशाख अमावस्या 2026 पर बन रहा है पितृ दोष से मुक्ति का महासंयोग। जानें 17 अप्रैल का शुभ मुहूर्त और वो 4 अचूक उपाय जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत। ...और पढ़ें

वैशाख अमावस्या 2026 पर करें ये उपाय (Image Source: AI-Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। घर में बिना वजह क्लेश और तनाव बना रहता है? कई बार ये सब हमारे जीवन में 'पितृ दोष' (Pitru Dosh) की वजह से होता है। साल 2026 की वैशाख अमावस्या (Vaishakh Amavasya 2026) आपके लिए इन परेशानियों से छुटकारा पाने का एक सुनहरा मौका लेकर आ रही है।
वैशाख के महीने को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और दान-पुण्य का महीना माना जाता है। चलिए जानते हैं कि इस साल वैशाख अमावस्या कब है और आप इस दिन क्या खास कर सकते हैं।
वैशाख अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
- अमावस्या तिथि की शुरुआत: 16 अप्रैल (गुरुवार), रात 8 बजकर 11 मिनट से।
- अमावस्या तिथि का समापन: 17 अप्रैल (शुक्रवार), शाम 5 बजकर 21 मिनट पर।
- मुख्य तिथि (उदयातिथि): उदयातिथि की गणना के आधार पर वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी।
चूंकि हम सनातन धर्म में 'उदयातिथि' (सूर्य उदय के समय की तिथि) को ही प्रधान मानते हैं, इसलिए वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल, शुक्रवार को ही मनाई जाएगी। दान-पुण्य और स्नान के लिए यही दिन सबसे श्रेष्ठ रहेगा।
पितृ दोष से मुक्ति के उपाय
अगर आप चाहते हैं कि आपके पूर्वजों का आशीर्वाद आप पर बना रहे, तो इस दिन ये 4 काम जरूर करें:
- श्रद्धा के साथ तर्पण: सुबह स्नान के बाद एक लोटे में जल लें, उसमें थोड़े काले तिल मिलाएं और अपने पितरों का ध्यान करते हुए उन्हें जल अर्पित करें। यह उन्हें तृप्ति देता है।
- पीपल के पेड़ की सेवा: मान्यता है कि पीपल में हमारे पितरों का वास होता है। इस दिन शाम को पीपल के नीचे सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं और 7 बार परिक्रमा करें। यह आपकी तरक्की के बंद रास्ते खोल सकता है।
- मछलियों की सेवा: छोटी-छोटी आटे की गोलियां बनाएं और उन्हें किसी तालाब या नदी में मछलियों को खिलाएं। यह उपाय न केवल पितृ दोष बल्कि कालसर्प दोष के असर को भी कम करने में मददगार माना जाता है।
- मौसम के अनुसार दान: वैशाख की गर्मी में किसी प्यासे को पानी पिलाना या मिट्टी का घड़ा (सुराही), सत्तू और मौसमी फलों का दान करना 'महादान' कहलाता है।
शास्त्रों का क्या कहना है?
पितृ दोष और अमावस्या के इन उपायों का जिक्र 'गरुड़ पुराण' और 'मत्स्य पुराण' जैसे प्राचीन ग्रंथों में प्रमुखता से मिलता है। शास्त्रों में वैशाख अमावस्या को 'सतुआनी अमावस्या' के आसपास होने के कारण और भी फलदायी बताया गया है। जहां जल और अन्न के दान को मोक्ष का मार्ग कहा गया है।

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कैसे करें पूजा और पितृ तर्पण?
- अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में नहाएं। अगर नदी पर जाना मुमकिन न हो, तो निराश न हों। घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें। इससे शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है।
- अपने पूर्वजों को याद करते हुए दक्षिण दिशा की तरफ मुंह करके बैठें। एक तांबे के लोटे में पानी और थोड़े काले तिल मिलाकर पितरों को प्यार से जल अर्पित करें।
- अमावस्या का महीना आते ही गर्मी शुरू हो जाती है, इसलिए इस दिन पानी का दान (जलदान) करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। इसके अलावा गरीबों या ब्राह्मणों को अनाज, गुड़ या कपड़े जरूर दान दें।
- शाम के वक्त घर की दक्षिण दिशा में या किसी पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का एक दीया जरूर जलाएं। ऐसा माना जाता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद आपके परिवार पर बना रहता है।
अमावस्या के नियम और मंत्र
इस दिन सात्विकता का पालन करें।
तामसिक भोजन और विवादों से दूर रहें।
पूजा के दौरान पवित्रता का ध्यान रखें।
गंगा स्नान जरूर करें।
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पूजा मंत्र
ॐ पितृभ्य: नम:।।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।।
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