वैशाख अमावस्या पर बन रहा सर्वार्थ सिद्धि योग, न करें ये गलतियां, पढ़ें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
वैशाख अमावस्या का दिन बेहद शुभ माना जा रहा है। इस दिन शुभ मुहूर्त में स्नान और दान करना अत्यंत ही फलदायी रहेगा। यहां पढ़ें वैशाख अमावस्या की डेट और मु ...और पढ़ें

सर्वार्थ सिद्धि योग में करें ये उपाय (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू कैलेंडर में हर महीने की अपनी अहमियत है, लेकिन वैशाख का महीना आध्यात्मिक रूप से बहुत खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी महीने से त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। इसलिए, वैशाख अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है। साल 2026 में वैशाख अमावस्या 17 अप्रैल को पड़ रही है।
पंचांग की गणना के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल 2026 को रात 08:11 बजे से हो जाएगी और इसका समापन 17 अप्रैल को शाम 05:21 बजे होगा। उदयातिथि (सूर्य उदय के समय की तिथि) के नियम के कारण मुख्य व्रत, स्नान और दान 17 अप्रैल, शुक्रवार को ही किया जाएगा।
वैशाख माह और अमावस्या का वर्णन पद्म पुराण और मत्स्य पुराण में विस्तार से मिलता है। शास्त्रों के अनुसार, वैशाख मास (Vaishakh Maas) में किया गया स्नान और दान अश्वमेध यज्ञ के समान फल देता है।
पितरों की शांति और दान का महत्व
अमावस्या का दिन मुख्य रूप से हमारे पूर्वजों यानी पितरों को समर्पित होता है। वैशाख की गर्मी में प्यासे को पानी पिलाना या पक्षियों के लिए दाना-पानी रखना बहुत पुण्य का काम माना जाता है। अगर आपकी कुंडली में पितृ दोष (Pitru Dosh) है या घर में अक्सर कलह रहती है, तो इस दिन पितरों के नाम से तर्पण (जल अर्पण) जरूर करना चाहिए।

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क्यों है यह अमावस्या इतनी खास?
इस बार की वैशाख अमावस्या पर ग्रहों का अद्भुत संयोग बन रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इन योगों को बहुत शुभ माना गया है। कहते हैं कि इन योगों में किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। अगर आप लंबे समय से किसी काम के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, तो इस दिन की गई प्रार्थना आपके लिए सफलता के द्वार खोल सकती है।
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स्नान-दान की विधि
सूर्य अर्घ्य: स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल (अर्घ्य) अर्पित करें।
विशेष दान: गरीब या जरूरतमंद लोगों को सत्तू, पानी का घड़ा (मटका), तिल और मौसमी फलों का दान करें।
पितृ तर्पण: इस दिन पूर्वजों का तर्पण या श्राद्ध कर्म करना बहुत शांतिदायक माना जाता है।
शनि देव की पूजा: दक्षिण भारत में इस दिन शनि जयंती मनाई जाती है, इसलिए शनि देव (Shani Dev) के मंदिर जाकर तेल अर्पित करना या उनके मंत्रों का जप करना भी कल्याणकारी रहेगा।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।