राजा बलि के वचन से जुड़ा है वामन द्वादशी का पर्व, इस दिन क्यों नहीं तोड़ना चाहिए कोई वादा?
23 सितंबर 2026 यानी कल वामन जयंती मनाई जाएगी। भगवान विष्णु के वामन अवतार की कृपा पाने के लिए पूजा ...और पढ़ें
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वामन अवतार पर न करें ये काम (AI-Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि भगवान विष्णु के पांचवें स्वरूप 'श्री वामन देव' के प्राकट्य उत्सव के रूप में मनाई जाती है। इसे वामन द्वादशी भी कहते हैं। सनातन परंपरा में मान्यता है कि इस दिन वामन देव की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस पूजा से व्यक्ति के अंदर से अहंकार का खात्मा होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
वामन जयंती 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
साल 2026 में वामन जयंती 23 सितंबर, बुधवार को मनाई जाएगी।
द्विादशी तिथि प्रारंभ: 22 सितंबर 2026, रात 09:43 बजे से
द्वादशी तिथि समाप्त: 23 सितंबर 2026, रात 10:50 बजे तक
व्रत तिथि: उदया तिथि के अनुसार 23 सितंबर को ही व्रत और पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा।
इस दिन क्या करना शुभ होता है?
- इस दिन विधि-विधान से वामन अवतार की कथा का पाठ करें या सुनें। इसके साथ, विष्णु सहस्रनाम या 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करना फलदायी माना जाता है।
- पूजा-पाठ के बाद ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को क्षमता के अनुसार अनाज, कपड़े, छाता, फल और सब्जियों का दान करें।
- सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थान को साफ करें। माना जाता है कि साफ और शांत वातावरण में पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।
किन बातों का ध्यान रखें और क्या न करें?
- श्रीमद्भागवत पुराण की वामन अवतार कथा के अनुसार, राजा बलि ने वामन देव को तीन पग भूमि देने का वचन निभाया था और अपना सिर समर्पित कर दिया था। इसलिए इस दिन किसी को दिया गया वादा जरूर पूरा करें।
- इस दिन अगर कोई जरूरतमंद आपके दरवाजे पर आ जाए, तो अपने सामर्थ्य के अनुसार उसकी मदद जरूर करें।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा या पर्व के दिन बाल और नाखून काटना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए, इस दिन भी इन चीजों को करने की मनाही है।
- व्रत न रखने पर भी इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज से दूरी बनाएं और सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।
- किसी के बारे में अपशब्द न कहें और न ही बिना वजह के विवादों में पड़ें।
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