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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 23, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री व्रत की तिथि और पूजा का तरीका… एक क्लिक में पढ़ें सब

Published: Fri, 23 May 2025 10:33 PM (IST)

पौराणिक कथा के अनुसार सावित्री ने अपने अल्पायु पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे। यमराज ने ...और पढ़ें

पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएं करती हैं पूजा।
पति की लंबी उम्र के लिए महिलाएं करती हैं पूजा।

HighLights

  1. ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट सावित्री का व्रत किया जाता है।
  2. इस बार वट सावित्री का व्रत 26 मई को सोमवार के दिन किया जाएगा।
  3. बरगद के पेड़ के चारों तरफ सूत लपेटते हुए की जाती है इसकी पूजा।

आनंद सागर पाठक, एस्ट्रोपत्री। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ महीने की अमावस्या को किया जाता है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन के लिए व्रत रखती हैं और वट यानी बरगद के पेड़ के नीचे पूजा करती हैं। इस साल ये व्रत 26 मई सोमवार को पड़ रहा है। 

बरगद के पेड़ के नीचे इस व्रत को करने के पीछे मान्यता है कि सावित्री की तपस्या से प्रभावित होकर सत्यवान के प्राण यमराज ने वट वृक्ष के नीचे ही लौटाए थे। इस व्रत को करने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्य मिलता है। वहीं, जो कुंवारी कन्याएं इस व्रत को करती हैं, उन्हें सुयोग्य वर मिलता है। 

ऐसे में यदि आप इस कठिन व्रत का पालन करने की सोच रही हैं, तो Astropatri के पंडित आनंद सागर पाठक से जानिए इस व्रत का क्या मुहूर्त है और कैसे इसे किया जाना चाहिए। चलिए पहले जानते हैं अमावस्या तिथि कब से कब तक रहेगी।

वट सावित्री अमावस्या मूहुर्त 

आरंभ- दोपहर 12:11 बजे से, 26 मई

समाप्त- प्रातः 08:31 बजे तक, 27 मई

वट सावित्रि व्रत की पूजा विधि

व्रत रखने वाली महिला ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे, लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें।

जिस वट (बरगद) वृक्ष के नीचे पूजा करनी है, वहां साफ-सफाई करें और पूजा का आसन बिछा लें। 

पूजा स्थल पर सावित्री और सत्यवान की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

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वट वृक्ष की जड़ में जल चढ़ाएं, फिर चंदन, हल्दी, रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।

वट वृक्ष के चारों ओर लाल सूती धागा लपेटते हुए सात बार परिक्रमा करें और हर परिक्रमा में पति की लंबी उम्र की कामना करें।

शृंगार की सामग्री जैसे सिंदूर, कुमकुम, बिंदी, चूड़ियां और मेहंदी आदि चढ़ानी चाहिए। 

पूरे मन से व्रत कथा का पाठ करें या सुनें। यह इस व्रत का मुख्य भाग होता है।

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पूजा के बाद वट वृक्ष और सावित्री-सत्यवान की आरती करें और हाथ जोड़कर प्रार्थना करें।

पूजा के बाद ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को फल, वस्त्र, मिठाई या धन का दान करें। यह व्रत को पूर्ण करता है।

अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद फल या हल्का भोजन लेकर व्रत का पारण करें।

(अगर आप आनंद सागर पाठक को कोई फीडबैक देना चाहते हैं तो hello@astropatri.com पर ईमेल कर सकते हैं।)

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