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    Kumbh Sankranti 2026 Date: विजया एकादशी पर कुंभ संक्रांति का दुर्लभ संयोग, नोट करें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 07:00 PM (IST)

    13 फरवरी को कुंभ संक्रांति है, जो विजया एकादशी के साथ पड़ रही है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि से कुंभ राशि में गोचर करेंगे। यह पवित्र नदियों में स्नान, ...और पढ़ें

    Kumbh Sankranti 2026 Date: कुंभ संक्रांति का महत्व

    Kumbh Sankranti 2026 Date: कुंभ संक्रांति का महत्व

    HighLights

    1. आत्मा के कारक सूर्य देव मेष राशि में उच्च होते हैं।

    2. सूर्य देव की विशेष कृपा सिंह राशि पर बरसती है।

    3. सूर्य देव की कृपा से करियर में सफलता मिलती है।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार 13 फरवरी को कुंभ संक्रांति है। इस शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में साधक गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इसके बाद भक्ति भाव से आत्मा के कारक सूर्य देव की पूजा करेंगे और दान-पुण्य करेंगे। इस साल कुंभ संक्रांति पर विजया एकादशी का संयोग बन रहा है।

     Vijaya ekadashi 2026

    ज्योतिषियों की मानें तो कुंभ संक्रांति और विजया एकादशी के दिन कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन संयोग में स्नान-ध्यान कर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा और दान करने से साधक पर भगवान भास्कर की कृपा बरसेगी। आइए, कुंभ संक्रांति के बारे में सबकुछ जानते हैं-

    सूर्य गोचर 2026 (Surya Gochar 2026)

    सूर्य देव 13 फरवरी यानी फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन सूर्य देव राशि परिवर्तन करेंगे। इस दिन सूर्य देव सुबह 04 बजकर 04 मिनट पर मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इस शुभ अवसर पर कुंभ संक्रांति और विजया एकादशी मनाई जाएगी। इस राशि में सूर्य देव 14 मार्च तक रहेंगे। इसके अगले दिन यानी 15 मार्च को मीन राशि में गोचर करेंगे।

    कुंभ संक्रांति शुभ मुहूर्त (Kumbha Sankranti Punya Kaal)

    कुंभ संक्रांति तिथि पर पुण्य काल सुबह 07 बजकर 01 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक है। वहीं, महा पुण्य काल सुबह 07 बजकर 01 मिनट से लेकर सुबह 08 बजकर 53 मिनट तक है। साधक महा पुण्य काल समय पर गंगा स्नान कर सूर्य देव की पूजा कर सकते हैं। कुंभ संक्रांति पर पुण्य काल 01 घंटा 51 मिनट का है। वहीं, पुण्य क्षण सुबह 04 बजकर 14 मिनट पर है।

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    कुंभ संक्रांति शुभ योग (Kumbh Sankranti Shubh Yog)

    कुंभ संक्रांति पर सौभाग्य और शिववास योग का निर्माण हो रहा है। वहीं, मूल और पूर्वाषाढा नक्षत्र का संयोग है। इन योग में लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करने से (Lord Vishnu Puja Vidhi) साधक की हर मनोकामना पूरी होगी।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।