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    Vijaya Ekadashi 2026: कब और क्यों मनाई मनाई जाती है विजया एकादशी? व्रत से पाप होते हैं दूर

    Updated: Mon, 02 Feb 2026 10:50 AM (IST)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर व्रत करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस द ...और पढ़ें

    Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का धार्मिक महत्व  (Image Source: AI-Generated)

    Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी का धार्मिक महत्व  (Image Source: AI-Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की साधना करने का विधान है। साथ ही मंदिर या गरीब लोगों में अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विजया एकादशी व्रत को विधिपूर्वक करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही हमेशा अन्न के भंडार भरे रहते हैं। 

    कब मनाई जाती है विजया एकादशी 2026?

    वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi 2026)व्रत किया जाता है। इस खास अवसर पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां की पूजा कर व्रत कथा का पाठ करते हैं। इससे साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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    विजया एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Vijaya Ekadashi 2026 Date and Shubh Muhurat)

    वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी (Kab Hai Vijaya Ekadashi 2026) को किया जाएगा और व्रत का पारण करने का समय 14 फरवरी को सुबह 07 बजे से 09 बजकर 14 मिनट तक है।
    फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर
    फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर

    विजया एकादशी का महत्व (Vijaya Ekadashi Significance)

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को विधिपूर्वक करने से कामों में आ रही बाधा दूर होती है। साथ ही जीवन की चुनौतियां दूर होती हैं। शत्रुओं पर विजय मिलती है। भगवान विष्णु साधक की पूजा से प्रसन्न होकर मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

    खबरें और भी

    ब्रह्म मुहूर्त - सुबह 05 बजकर 18 मिनट से 06 बजकर 09 मिनट तक
    विजय मुहूर्त - दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से 03 बजकर 12 मिनट तक
    गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 08 मिनट से 06 बजकर 24 मिनट तक
    अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक

    विष्णु मंत्र
    1. ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु ।

    यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्”।।

    2. वृंदा,वृन्दावनी,विश्वपुजिता,विश्वपावनी |

    पुष्पसारा,नंदिनी च तुलसी,कृष्णजीवनी ।।

    एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम |

    य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत।।

    3. ॐ वासुदेवाय विघ्माहे वैधयाराजाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||

    ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे अमृता कलसा हस्थाया धीमहि तन्नो धन्वन्तरी प्रचोदयात् ||

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।