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    Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर करें तुलसी चालीसा का पाठ, मिलेगा श्री हरि का आशीर्वाद

    Updated: Mon, 02 Feb 2026 03:46 PM (IST)

    विजया एकादशी (Vijaya Ekadashi 2026) व्रत बहुत शुभ माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। इस साल यह पर्व 13 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन भगवा ...और पढ़ें

    Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर करें ये काम। ( Ai Generated)

    Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर करें ये काम। ( Ai Generated)

    HighLights

    1. एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सबसे पुण्यदायी माना गया है

    2. विजया एकादशी का व्रत 13 फरवरी को रखा जाएगा

    3. इस दिन श्री हरि की पूजा होती है

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Vijaya Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सबसे पुण्यदायी माना गया है। जैसा कि नाम से ही साफ है कि इस एकादशी का व्रत करने से साधक को सभी कामों में सफलता मिलती है। साथ ही जीवन में सुख-शांति आती है। साल 2026 में विजया एकादशी का पावन पर्व 13 फरवरी को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ तुलसी माता की विशेष आराधना करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ऐसे में सुबह उठें और स्नान करें। फिर श्री हरि का ध्यान करें। उन्हें पीले फल, मिठाई और फूल-माला अर्पित करें। इसके बाद तुलसी चालीसा का पाठ कर, आरती करें, जो इस प्रकार हैं -

    magh month

    ।।दोहा तुलसी चालीसा।।

    श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय।

    जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।।

    नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी।

    दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।।

    विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी।

    भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।।

    जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा।

    करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।।

    कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा।

    तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।।

    कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी।

    वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।।

    श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई।

    कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।।

    छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी।

    तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।।

    औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता,

    देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।।

    वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया।

    नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।।

    नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी।

    नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।।

    नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि।

    नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।।

    नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि।

    जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।।

    निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ।

    करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।।

    शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं।

    क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।।

    मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै।

    जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।।

    बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा।

    प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।।

    चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे।

    करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।।

    पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की।

    यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।।

    करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं।

    है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।।

    तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी।

    भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।।

    यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय।

    गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।।

    यह भी पढ़ें- Vijaya Ekadashi 2026: कब और क्यों मनाई मनाई जाती है विजया एकादशी? व्रत से पाप होते हैं दूर

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