Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    Vikata Sankashti Chaturthi 2026: विकट संकष्टी चतुर्थी पर पढ़ें यह व्रत कथा, मिलेगा पूजा का शुभ फल

    Updated: Sun, 05 Apr 2026 08:59 AM (GMT+05:30)

    विकट संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन व्रत और पूजा करने से सभी दुख दूर होते हैं। ...और पढ़ें

    Vikata Sankashti Chaturthi 2026: विकट संकष्टी चतुर्थी कथा। (Ai Generated Image)

    Vikata Sankashti Chaturthi 2026: विकट संकष्टी चतुर्थी कथा। (Ai Generated Image)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में विकट संकष्टी चतुर्थी कथा का व्रत बेहद शुभ माना गया है। यह भगवान गणेश को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत कथा सुनने या पढ़ने मात्र से साधक के जीवन की सभी समस्याओं का अंत हो जाता हैं। अगर आप आज व्रत (Vikata Sankashti Chaturthi 2026) रख रहे हैं या पूजा कर रहे हैं, तो विकट संकष्टी चतुर्थी कथा का पाठ जरूर करें, जो इस प्रकार हैं -

    Vikata Sankashti Chaturthi 2026 Katha 1

    Ai Generated Image

    विकट संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा (Vikata Sankashti Chaturthi 2026 Katha)

    एक समय कामासुर नाम के दैत्य ने अपनी कठोर तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया और उनसे अजय होने का वरदान प्राप्त कर लिया। वरदान पाकर कामासुर अहंकारी हो गया और उसने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया। उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और सभी देवताओं को अपना बंदी बना लिया। दुखी होकर सभी देवता भगवान शिव के पास गए, लेकिन शिव जी ने बताया कि कामासुर को उनके ही वरदान की शक्ति प्राप्त है, इसलिए उसे केवल विघ्नहर्ता गणेश ही हरा सकते हैं। तब देवताओं ने भगवान गणेश की आराधना की। देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान गणेश ने विकट रूप धारण किया और मोर पर सवार होकर कामासुर से युद्ध करने पहुंचे। भगवान गणेश के इस विशाल और तेजस्वी रूप को देखकर कामासुर डर गया। वहीं, गणेश जी ने अपनी बुद्धि और शक्ति से कामासुर के घमंड को नष्ट कर दिया। अंत में कामासुर ने भगवान गणेश के चरणों में गिरकर क्षमा मांगी।

    गणेश जी ने उसे जीवनदान दिया और देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया, जिस दिन गणेश जी ने कामासुर पर विजय प्राप्त की थी वह वैशाख चतुर्थी का दिन था, जिसे विकट संकष्टी चतुर्थी कहा गया। इस दिन व्रत और बप्पा की पूजा-अर्चना करने से सभी दुखों का अंत होता है। साथ ही शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

    कथा सुनने के बाद क्या करें?

    • कथा पूर्ण होने के बाद भगवान गणेश को 21 दुर्वा अर्पित करें।
    • पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांगें।
    • इस दिन तिल या गुड़ का दान करना बेहद फलदायी माना जाता है।

    खबरें और भी

    यह भी पढ़ें- Vikata Sankashti Chaturthi 2026: वैशाख संकष्टी चतुर्थी कब है? व्रत से पहले जान लें इससे जुड़े नियम

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।