अपनी जन्म कुंडली के अनुसार सावन सोमवार को कौन सा मुखी रुद्राक्ष धारण करें?
सावन मास में रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जो भगवान शिव के अश्रुओं से उत्पन्न हुआ है। ...और पढ़ें
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सावन सोमवार में राशि अनुसार रुद्राक्ष धारण करने के फायदे (Picture Credits- AI Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में श्रावण मास का महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह महीना भगवान शिव को काफी प्रिय है। इस शुभ महीने के दौरान भक्त अच्छी सेहत, सद्बुद्धि, शांति और आध्यात्मिक विकास के लिए महादेव की खास पूजा अर्चना करते हैं। सावन के महीने में रुद्राक्ष धारण करने की परंपरा भी अत्यंत खास मानी जाती है। ऐसा इसलिए क्योंकि कहा जाता है कि, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शंकर के आंसुओं से हुई है, जिस कारण इसे भक्ति, दिव्य ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
हिंदू परंपरा और वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सावन माह में राशि अनुसार रुद्राक्ष धारण करने से इसके आध्यात्मिक लाभ की प्राप्ति होती है। हममें से अधिकतर लोग बिना ज्योतिषीय सलाह और धार्मिक ज्ञान के रुद्राक्ष धारण कर लेते हैं, जो कि पूर्णता उचित नहीं है। एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी से जानते हैं राशि अनुसार कौन-सा रुद्राक्ष धारण करना चाहिए?
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, रुद्राक्ष को भगवान शिव के अश्रु माना गया है। सावन के महीने में रुद्राक्ष धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अपनी राशि के अनुकूल रुद्राक्ष धारण करने से ग्रहों के दोष शांत होते हैं और शिव कृपा प्राप्त होती है।

राशि के अनुसार रुद्राक्ष का चयन
मेष व वृश्चिक राशि
3 मुखी (अग्नि देव) या 11 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
वृषभ व तुला राशि
6 मुखी (भगवान कार्तिकेय) या 13 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
मिथुन व कन्या राशि
4 मुखी (भगवान ब्रह्मा) या 10 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
कर्क राशि
2 मुखी (शिव-पार्वती/अर्धनारीश्वर रूप) रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
सिंह राशि
1 मुखी या 12 मुखी (सूर्य देव का प्रतीक) रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
धनु व मीन राशि
5 मुखी (कालाग्नि रुद्र) रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
मकर व कुंभ राशि
7 मुखी (लक्ष्मी जी) या 14 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
धारण करने के महत्वपूर्ण नियम
रुद्राक्ष धारण करते समय निम्नलिखित नियमों का पालन करना अनिवार्य है:
शुद्धिकरण और प्रतिष्ठा
रुद्राक्ष को सावन के सोमवार या शिवरात्रि के दिन गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध करके शिवलिंग से स्पर्श कराकर धारण करें।
धागा व धातु
इसे लाल या पीले धागे अथवा चांदी या सोने की चेन में धारण करें।
खान-पान का परहेज
रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को मदिरा और नशीली वस्तुओं से सख्त परहेज करना चाहिए।
पवित्रता का ध्यान
सोते समय या अशौच स्थानों पर जाते समय इसे उतारकर मंदिर में रख देना चाहिए।
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