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सूर्य या चंद्र ग्रहण के समय शरीर से क्यों उतार देने चाहिए रुद्राक्ष और रत्न? इसके पीछे का कारण हैरान कर देगा!

Updated: Wed, 12 Aug 2026 11:37 AM (IST)

हिंदू धर्म में रुद्राक्ष और रत्नों को सकारात्मक व पवित्र माना जाता है। लेकिन क्या सूर्य या चंद्र ग्रहण के ...और पढ़ें

ग्रहण काल में न पहनें रुद्राक्ष या रत्न

ग्रहण काल में न पहनें रुद्राक्ष या रत्न

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संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन परंपरा में सदियों से लोग रुद्राक्ष और रत्नों को धारण करते आ रहे हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र और धर्म शास्त्रों के अनुसार रुद्राक्ष और रत्न दोनों ही आध्यात्मिक ऊर्जा को सक्रिय करने के साथ नकारात्मक ऊर्जा से बचाव के लिए अहम माने जाते हैं। जहां रुद्राक्ष को शिव से जुड़ा अंश माना जाता है, वहीं रत्न सिर्फ सुंदरता तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि इन्हें ब्रह्मांडीय ऊर्जा, ग्रहों के प्रभाव और आध्यात्मिक संतुलन के नजरिए से बेहद खास माना जाता है।

लेकिन बात जब सूर्य या चंद्र ग्रहण की आती है, तो अधिकतर लोगों के मन में एक सवाल आता है कि, क्या ग्रहण काल के दौरान रुद्राक्ष या रत्न को धारण करना सही है? आइए जानते हैं इसी सवाल का जवाब एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी से?

ग्रहण काल में रुद्राक्ष या रत्न क्यों नहीं पहनना चाहिए? 

एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहण काल के दौरान रुद्राक्ष और रत्न धारण करने को लेकर सनातन धर्म, ज्योतिष और मान्यताओं में साफ तौर पर कई तरह की बातें कही गई है।

ग्रहण का समय केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा के भारी उतार-चढ़ाव और सूतक काल के प्रभाव का समय होता है। इस दौरान धारण की गई पवित्र वस्तुएं राहु-केतु के नकारात्मक प्रभाव को अवशोषित (सोख) कर सकती हैं।

सूतक काल और ऊर्जा का प्रभाव

ग्रहण काल में रुद्राक्ष और रत्न उतारने के मुख्य कारण इस प्रकार हैं-

नकारात्मक तरंगों का प्रभाव
जब सूर्य या चंद्र ग्रहण लगता है, तो राहु और केतु का प्रभाव बढ़ जाता है। इस दौरान वातावरण में दूषित तरंगे फैल जाती हैं।

रुद्राक्ष और रत्नों की पवित्रता
रुद्राक्ष साक्षात भगवान शिव का स्वरूप है, जो अत्यधिक पवित्र और उच्च ऊर्जा का स्रोत है। वहीं, रत्न (जैसे नीलम, माणिक्य, पुखराज) विशिष्ट ग्रहों की किरणों को आकर्षित कर शरीर में संचारित करते हैं।

नकारात्मक ऊर्जा से बचाव
ग्रहण के समय इन रत्नों और रुद्राक्ष में राहु-केतु की प्रतिकूल ऊर्जा अवशोषित होने का भय रहता है। यदि यह ऊर्जा आपके आभामंडल से सीधे टकराती है, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

wearing rudraksha during 2026 solar and lunar eclipses astrology precautions

शुद्धिकरण और पुनः धारण करने की विधि

उतारने का सही समय
ग्रहण शुरू होने से पहले (सूतक काल के समय) ही पहने हुए रुद्राक्ष और सभी प्रकार के रत्नों को उतारकर पूजा स्थान में किसी साफ कपड़े पर रख देना चाहिए।

ग्रहण काल में मंत्र जप
ग्रहण के दौरान यदि आप मंत्र सिद्ध कर रहे हैं, तो रुद्राक्ष की माला से जप किया जा सकता है, लेकिन इसे शरीर पर पहनना वर्जित माना गया है।

पुनः धारण करने का नियम
ग्रहण समाप्त होने पर स्वयं स्नान करें। तत्पश्चात रुद्राक्ष और रत्नों को कच्चे दूध और गंगाजल से अच्छी तरह धोएं। धूप-दीप दिखाकर, "ॐ नमः शिवाय" या संबंधित ग्रह के मंत्र का 108 बार जाप करें और फिर से धारण करें। ऐसा करने से उनकी पवित्रता पुनः बहाल हो जाती है।

इस साल ग्रहण कब-कब लगेगा? 

वर्ष 2026 में कुल 4 बार ग्रहण काल लगेगा। जिसमें दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण शामिल हैं। साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगा चुका है, जबकि दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026, बुधवार के दिन लगने जा रहा है। यह भारत में दृश्यमान नहीं है।

जबकि इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026 को लगा था। दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण इसी साल अगस्त महीने में 28 तारीख को लगने जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण भी भारत में नहीं दिखाई देगा। इसके अलावा इसी दिन रक्षा बंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।