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ग्रहण के दौरान जन्मे बच्चों को जीवनभर करना पड़ता है संघर्ष? सच या सिर्फ वहम

Updated: Wed, 12 Aug 2026 10:57 AM (IST)

सूर्य ग्रहण के दौरान बच्चे का जन्म होना शुभ है या अशुभ? शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के प्रभाव और उपाय के बारे में पढ़ें।

सूर्य ग्रहण में जन्म का असर (AI-Generated Image)

सूर्य ग्रहण में जन्म का असर (AI-Generated Image)

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संक्षेप में पढ़ें

अक्सर परिवार में किसी बच्चे का जन्म सूर्य ग्रहण के दौरान होता है, तो खुशी के साथ-साथ एक अनजाना डर भी मन में घर कर जाता है। लोग सोचने लगते हैं कि क्या बच्चे का जीवन मुश्किलों से भरा रहेगा? क्या ग्रहण की छाया उसके करियर या सेहत पर असर डालेगी? वैदिक ज्योतिष के प्रामाणिक ग्रंथों और आधुनिक विज्ञान, दोनों के नजरिए से समझना बहुत जरूरी है।

क्या कहते हैं ज्योतिष शास्त्र?

वैदिक ज्योतिष के सबसे भरोसेमंद ग्रंथों में से एक 'बृहत् पाराशर होरा शास्त्र' के अध्याय 91 में एक श्लोक के जरिए ग्रहण काल में जन्म लेने के प्रभावों का जिक्र मिलता है।

सूर्येन्दुग्रहणे काले येषां जन्म भवेद् द्विज।
व्याधि: कष्टं च दारिद्र्यं तेषां मृत्युभयं भवेत्।।

इसका मतलब है कि ग्रहण के समय जन्मे शिशु को जीवन में स्वास्थ्य संबंधी अड़चनें, कड़ा मानसिक व शारीरिक संघर्ष और आर्थिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

इसके पीछे का मुख्य कारण यह है कि सनातन परंपरा में सूर्य को केवल एक ग्रह या तारा नहीं माना गया। सूर्य व्यक्ति की आत्मा, चेहरे के तेज, आत्मविश्वास, समाज में मिलने वाले मान-सम्मान, पिता के सुख और जीवन-शक्ति का प्रतीक है। ग्रहण के समय सूर्य पर राहु का प्रभाव बहुत गहरा होता है, जिससे सूर्य का स्वाभाविक तेज मंद पड़ जाता है।

इसी वजह से जन्म कुंडली का विश्लेषण करते समय ज्योतिषी यह जरूर देखते हैं कि सूर्य और राहु के बीच 'डिग्री की दूरी' कितनी है। अगर सूर्य और राहु बिल्कुल करीब हों तो प्रभाव ज्यादा होता है, लेकिन अगर ये दोनों ग्रह की दूरी ज्यादा हो या कुंडली में अन्य शुभ ग्रहों की स्थिति मजबूत हो, तो नकारात्मक प्रभाव बहुत हद तक कम हो जाता है।

दोष निवारण और शांति के उपाय

अगर किसी बच्चे का जन्म ग्रहण काल में हुआ भी है, तो घबराने की जरूरत बिलकुल नहीं होती। शास्त्रों में इसके सरल और सटीक उपाय बताए गए हैं:

  • सूर्य-राहु शांति पूजा: बच्चे के जन्म के बाद सूर्य देव और राहु की प्रतिमा बनाकर उनकी विधिवत पूजा और मंत्रों का जप कराया जाता है।
  • दान-पुण्य: सूर्य से संबंधित वस्तुएं (जैसे गेहूं, तांबा, लाल वस्त्र या गुड़) का दान करने से ग्रहण दोष का असर समाप्त हो जाता है।

क्या कहता है विज्ञान?

विज्ञान स्पष्ट रूप से मानता है कि अंतरिक्ष में होने वाली इस खगोलीय हलचल का पृथ्वी पर जन्म लेने वाले किसी भी शिशु की किस्मत, बुद्धिमत्ता, सफलता या स्वास्थ्य से कोई लेना-देना नहीं होता।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।