महाभारत का वो जादुई धनुष, जिससे थर-थर कांपते थे देवता; जानिए अर्जुन के बाद कहां गया 'गांडीव'?
महाभारत के शक्तिशाली योद्धा अर्जुन के गांडीव धनुष की उत्पत्ति, शक्ति और उसके रहस्यमयी इतिहास के बारे में जानिए? ...और पढ़ें

महाभारत के बाद अर्जुन का गांडीव धनुष कहां गया? (AI-Generated Image)
HighLights
गांडीव धनुष का निर्माण स्वयं ब्रह्मा ने किया था।
यह धनुष अर्जुन से पहले कई देवताओं के पास रहा।
महाभारत युद्ध के बाद गांडीव वरुण देव को लौटाया गया।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत काल से जुड़े ऐसे कई किस्से और कहानियां प्रचलित हैं, जो अपने आप में रहस्यमयी होने के साथ काफी रोचक है। इन्हीं में से एक कहानी पांडव पुत्र अर्जुन की है, जो हिंदू महाकाव्य महाभारत के सबसे शक्तिशाली योद्धाओं में से एक थे। असाधारण धनुर्विद्या और एकाग्रता के लिए अर्जुन का नाम आज भी सम्मान से लिया जाता है।
अर्जुन का असल हथियार उनका शक्तिशाली गांडीव धनुष था। माना जाता है कि, इस गांडीव धनुष को खुद ब्रह्मा ने बनाया था। यह धनुष इतना शक्तिशाली था कि, खुद देवता भी इससे डरते थे। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन ने गांडीव धनुष से कई महान योद्धाओं और देवताओं को हराया था।
कहा जाता है कि, जब ब्रह्मा ने इस गांडीव-धनुष का निर्माण किया था, तब इसे बनाने के पीछा का उनका उद्देश्य था कि, इस धनुष से अन्याय करने वाले दुष्टों को सजा दी जाएगी। धार्मिक पुराणों में बताया जाता है कि, गांडीव धनुष से एक बार में एक लाख से ज्यादा शत्रुओं को पराजित किया जा सकता था।
अर्जुन से पहले किन-किन देवताओं के पास पहुंचा गांडीव धनुष?
पांडव राजकुमार अर्जुन से पहले गांडीव धनुष कई हाथों से होकर गुजरा। ब्रह्मा ने 1 हजार सालों तक इस धनुष का इस्तेमाल किया। उसके बाद ब्रह्मा ने इसे इंद्र को सौंप दिया।
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इंद्र ने इस धनुष का 3585 सालों तक इस्तेमाल किया। इसके बाद चंद्र देव ने 500 सालों तक और वरुण देव ने 100 सालों तक इसके बाद वरुण देव ने इसे अर्जुन को सौंप दिया।

महाभारत युद्ध के बाद गांडीव धनुष का क्या हुआ?
माना जाता है कि, महाभारत युद्ध के बाद जब युधिष्ठिर राजा बने। पांडव बहुत जल्दी ही सांसारिक जीवन से ऊब चुके थे। उन्होंने परीक्षित को राजा बनाया और वन की ओर निकल गए। वन यात्रा के दौरान उनके सामने अग्नि देव प्रकट हुए।
उन्होंने पांडवों को प्रणाम कर अर्जुन से कहा कि, महाभारत युद्ध समाप्त हो चुका है। अब उन्हें यह गांडीव और धनुष को उसके पूर्व स्वामी यानी वरुण देव को लौटा देना चाहिए। अग्नि देव की बातों को मानकर अर्जुन ने आखिर में गांडीव धनुष वरुण देव को दे दिया।
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