कुंडली मिलान में क्या होता है ग्रह मैत्री दोष, शादी की सफलता के लिए क्यों माना जाता है जरूरी?
कुंडली मिलान में ग्रह मैत्री दोष वर-वधू के मानसिक और भावनात्मक तालमेल को दर्शाता है, जो सफल वैवाहिक जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दोष होने पर र ...और पढ़ें

शादी की सफलता के लिए कुंडली में ग्रह मैत्री का महत्व और दोष से बचाव (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। शादी को दो लोगों के मिलन के साथ जन्मों तक का रिश्ता भी माना जाता है। कहा जाता है कि जोड़ियां ऊपर से बनकर आती हैं और धरती पर उन्हें मिलाया जाता है। इसी वजह से शादी के लिए दो परिवारों का जुड़ना, आपसी सामंजस्य होना जितना जरूरी माना जाता है उतना ही जरूरी होता है कुंडली का मिलान।
ज्योतिष में ऐसा कहा जाता है कि कुंडली में मौजूद 36 गुणों में से यदि यह मिलान अनुकूल आता है तो इससे आगे चलकर वर और वधू की जोड़ी अच्छी बनी रहती है और आपसी मनमुटाव नहीं होते हैं। वहीं कई बार कुंडली के न मिलने की वजह से आपसी लड़ाइयां होती हैं जिसका सीधा असर लोगों के वैवाहिक जीवन में पड़ता है।
कुंडली मिलान में कई चीजों का मिलना जरूरी माना जाता है जैसे नाड़ी, भकूट और ग्रह मैत्री। इन सभी का अपना अलग महत्व है, लेकिन अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए कुंडली में ग्रह मैत्री दोष नहीं होना चाहिए। आइए आपको बताते हैं इस दोष के बारे में और कुंडली मिलान में इसे जरूरी क्यों माना जाता है।
क्या होती है कुंडली में ग्रह मैत्री
'ग्रह मैत्री' किसी विवाहित जोड़े की चंद्र राशियों के स्वामी ग्रहों के बीच मैत्री की जांच करती है, जिससे विवाहित जोड़े में मानसिक तालमेल, भावनात्मक जुड़ाव और बातचीत के तरीकों का पता चलता है।
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'अष्ट कूट' मिलान में 36 में से 5 अंक 'ग्रह मैत्री' के होते हैं और ऐसा माना जाता है कि अगर आपसी ग्रह मैत्री हो तो रिश्तों में स्वाभाविक रूप से समझ बनी रहती है, वहीं ग्रह मैत्री कमजोर होने पर वैवाहिक जीवन में सामंजस्य बनाए रखने के लिए बहुत ज्यादा कोशिश करनी पड़ती है।
हालांकि, ऐसा माना जाता है कि प्यार, सम्मान और समझदारी से कमजोर ग्रह मैत्री को भी संतुलित किया जा सकता है जिससे रिश्ते में लंबे समय तक तालमेल बना रहे। अगर आप कुंडली मिलान पर विश्वास करते हैं तो आपको ग्रह मैत्री दोष को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ग्रह मैत्री का शादी पर क्या प्रभाव होता है?
'ग्रह मैत्री' का मतलब इस बात से है कि ग्रह एक-दूसरे के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। शादीशुदा जोड़े के लिए क्या ग्रह एक-दूसरे का साथ देते हैं या टकराव पैदा करते हैं।
ग्रहों की यह आपसी दोस्ती शादी में तालमेल और लंबे समय तक भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। चूंकि चंद्रमा भावनाओं और मन का प्रतीक है, इसलिए इसके प्रभाव को समझना जरूरी होता है।
ग्रह मैत्री दोष कब लगता है?
बहुत से लोग ऐसा सोचते हैं कि ज्योतिष सिर्फ जीवन की बड़ी घटनाओं के बारे में बताता है। लेकिन, ग्रह मैत्री किसी भी व्यक्ति की शादीशुदा जिंदगी के रोजमर्रा के अनुभवों पर भी असर डालती है। किसी की कुंडली में ग्रह मैत्री दोष तब लगता है जब कुंडलियों के मिलान पर ग्रह मैत्री में शून्य अंक प्राप्त होते हैं। हालांकि, ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि ऐसी शादियां सफल नहीं होती हैं, लेकिन कई बार इन शादियों में आपसी मनमुटाव जरूरत से ज्यादा बढ़ने लगते हैं जो वैवाहिक जीवन में झगड़ों का कारण बन सकते हैं।
अगर आप भी कुंडली मिलान को अहमियत देते हैं तो ग्रह मैत्री अच्छी होने से वैवाहिक रिश्तों में सामंजस्य बना रह सकता है।
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