Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    सूर्य ग्रहण से जुड़े 7 धार्मिक नियम, जिनका आज भी पालन करते हैं करोड़ों लोग

    Updated: Thu, 11 Jun 2026 05:34 PM (IST)

    साल 2026 का दूसरा सूर्यग्रहण 12 अगस्त को लगने जा रहा है। ऐसे में सूर्यग्रहण के दौरान 7 ऐसे नियमों के बारे में जानिए जिस पर आज भी कई लोग विश्वास करते ह ...और पढ़ें

    सूर्य ग्रहण में क्यों मना हैं ये काम? (AI-Generated Image)

    सूर्य ग्रहण में क्यों मना हैं ये काम? (AI-Generated Image)

    HighLights

    1. ग्रहण काल में भोजन न करें, तुलसी पत्ते रखें।

    2. सोने, झाड़ू-पोछा, सिलाई-बुनाई से बचें, मंत्र जाप करें।

    3. गर्भवती महिलाएं बाहर न निकलें, नुकीली चीजें हटा दें।

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण को बेहद खास खगोलीय और धार्मिक घटना माना जाता है। धर्मग्रंथों में ग्रहण काल को सामान्य समय की तुलना में ज्यादा संवेदनशील और अशुभ माना जाता है।

    साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 09 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 13 अगस्त 2026 की सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा।

    सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ खास नियमों को पालन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हालांकि इन मान्यताओं को धार्मिक और लोक परंपरा के रूप में देखा जाता है। आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण से जुड़े 7 ऐसे नियमों के बारे में जिन्हें लोग सदियों से मानते आ रहे हैं।

    ग्रहण के दौरान न खाने की सलाह

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जब सूर्य या चंद्र ग्रहण लगता है, तब भोजन करना उचित नहीं माना जाता। मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। यही कारण है कि, लोग ग्रहण शुरू होने से पहले ही भोजन कर लेते हैं और खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते रखते हैं।

    ग्रहण काल में झाड़ू पोछा लगाना

    कई हिंदू परिवारों में ग्रहण काल के दौरान झाड़ू और पोछा लगाने से बचा जाता है। लोक मान्यताओं के मुताबिक, ग्रहण काल का समय ध्यान और नाम जप करने के लिए सबसे उपयुक्त होता है, इसलिए घरेलू कार्यों को ग्रहण के समाप्त होने के बाद किया जाता है।

    सोने की मनाही

    ग्रहण काल को लेकर लोक मान्यता यह भी है कि, इस दौरान सोना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि, जब सूर्य या चंद्र ग्रहण लगता है, तो व्यक्ति को मंत्र जाप, ध्यान भगवान के स्मरण में समय बिताना चाहिए।

    खबरें और भी

    सिलाई-बुनाई का काम न करें

    माना जाता है कि, सूर्य ग्रहण के दौरान गलती से भी सिलाई, कढ़ाई या बुनाई के लिए नुकीली चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिए। इस दौरान नाखून या बाल काटना भी अशुभ है। मान्यता है कि, ग्रहण की अवधि के दौरान किसी भी तरह का शुभ कार्य करने से उसके अशुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

    मंदिर में प्रवेश या मूर्ति पूजा करना

    सूर्य ग्रहण के दौरान मंदिर के कपाट पूरी तरह बंद कर दिए जाते हैं। इसके अलावा पूजा-पाठ से जुड़ी समाग्री, मूर्ति को छूना या तुलसी तोड़ना पूरी तरह वर्जित माना जाता है। इस दौरान केवल मानसिक रूप से भगवान का नाम जप और ध्यान करना ही शुभ माना जाता है।

    गर्भवती महिलाओं को बाहर न निकलना

    माना जाता है कि सूर्य या चंद्र ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को बाहर निकलने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रहण का अशुभ प्रभाव मां और बच्चे दोनों पर पड़ सकता है। कई घरों में ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाओं के आस-पास से नुकीली और धारदार चीजें हटा दी जाती हैं।

    ये कुछ ऐसे नियम हैं जिन्हें आज भी अधिकतर घरों में सूर्यग्रहण के दौरान माना जाता है। सूर्य ग्रहण से जुड़े ये नियम मुख्य रूप से धार्मिक मान्यताओं, परंपराओं और लोकविश्वासों पर आधारित हैं। अलग-अलग हिस्सों और परिवारों में इन नियमों पर पालन करने का तरीका अलग हो सकता है।

    यह भी पढ़ें- साल के दूसरे सूर्य ग्रहण की तारीख पक्की, क्या भारत में दिखेगा यह खगोलीय नजारा?

    यह भी पढ़ें- सूर्य ग्रहण के दौरान क्यों जरूरी हैं तुलसी और गंगाजल? जानें घर और भोजन की शुद्धि का सही तरीका

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।