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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 05, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Bhanu Saptami 2024: सावन महीने में कब मनाई जाएगी भानु सप्तमी? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग

    By Pravin KumarEdited By: Pravin Kumar
    Updated: Mon, 05 Aug 2024 02:21 PM (IST)

    भानु सप्तमी (Bhanu Saptami 2024) पर विधि-विधान से आत्मा के कारक सूर्य देव की उपासना की जाती है। साथ ही आर्थिक स्थिति के अनुसार दान-पुण्य किया जाता है। ...और पढ़ें

    Bhanu Saptami 2024: भानु सप्तमी का धार्मिक महत्व
    Bhanu Saptami 2024: भानु सप्तमी का धार्मिक महत्व

    HighLights

    1. यह पर्व हर महीने मनाया जाता है।
    2. इस दिन सूर्य देव की उपासना की जाती है।
    3. भानु सप्तमी पर शुभ योग का निर्माण हो रहा है।

    नई दिल्ली, अध्यात्म डेस्क। Bhanu Saptami 2024: सनातन धर्म में भानु सप्तमी पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा एवं उपासना की जाती है। धार्मिक मत है कि भानु सप्तमी पर सूर्य देव की उपासना करने से न केवल कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है, बल्कि आरोग्य जीवन का वरदान प्राप्त होता है। अगर आप भी सूर्य देव की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो भानु सप्तमी पर सूर्य देव की विधि विधान से पूजा-उपासना करें। आइए, शुभ मुहूर्त एवं योग जानते है-

    भानु सप्तमी शुभ मुहूर्त

    वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 11 अगस्त को सुबह 05 बजकर 44 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 12 अगस्त को सुबह 07 बजकर 55 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि से गणना की जाती है। अत: 11 अगस्त को भानु सप्तमी मनाई जाएगी।

    महत्व

    ज्योतिषियों की मानें तो सूर्य देव की उपासना करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है। कुंडली में सूर्य मजबूत होने से करियर और कारोबार में मन मुताबिक सफलता मिलती है। साथ ही आय, आयु, सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। धर्म शास्त्रों में निहित है कि भानु सप्तमी पर सूर्य देव का प्रादुर्भाव हुआ है। अत: इस तिथि पर सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है।

    शुभ योग

    ज्योतिषियों की मानें तो भानु सप्तमी पर कई मंगलकारी शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन दोपहर 03 बजकर 49 मिनट तक शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इसके बाद शुक्ल योग का संयोग है। इस दिन स्वाति नक्षत्र का निर्माण हो रहा है। वहीं, गर और वणिज करण का भी संयोग हैं।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।