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    जब अपने ही बेटे को देखकर डर गए थे भगवान सूर्य, पढ़ें शनि देव के जन्म की पूरी कथा

    By Vaishnavi DwivediEdited By: Vaishnavi Dwivedi
    Updated: Mon, 02 Mar 2026 03:19 PM (IST)

    ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है और भगवान सूर्य को ग्रहों का राजा। ...और पढ़ें

    Shani Dev: शनि देव की जन्म कथा। (Ai Generated Image)

    Shani Dev: शनि देव की जन्म कथा। (Ai Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता माना गया है। अक्सर लोग शनि देव के नाम से घबराते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि खुद उनके पिता, ग्रहों के राजा सूर्य देव (Surya Dev) भी उन्हें पहली बार देखकर डर गए थे? भगवान सूर्य और शनि देव के बीच पिता-पुत्र का रिश्ता होने के बाद भी बहुत कड़वाहट है। आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा।

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    Ai Generated Image

    सूर्य देव का तेज

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, सूर्य देव का विवाह देवी संध्या से हुआ था। संध्या सूर्यदेव की पत्नि तो थीं, लेकिन वे उनके तेज को सहन नहीं कर पा रही थीं। अपनी इस समस्या का हल निकालने के लिए संध्या ने तपस्या करने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने तप से अपनी जैसी दिखने वाली छाया को प्रकट किया और उसे अपनी जगह सूर्य देव की सेवा में छोड़कर खुद वन में तपस्या करने चली गईं। सूर्य देव को इसकी जानकारी नहीं थी।

    शनि देव का जन्म

    छाया सूर्य देव की पत्नी के रूप में रहने लगीं। छाया भगवान शिव की परम भक्त थीं। जब शनि देव उनके गर्भ में थे, तब मां छाया ने दिन-रात भगवान शिव की तपस्या की और वे धूप-छांव की चिंता किए बिना भूखी-प्यासी तप में लीन रहीं। तपस्या के प्रभाव की वजह से गर्भ में पल रहे बालक का रंग बिल्कुल काला हो गया।

    जब शनि देव का जन्म हुआ, तो वह कृष्ण वर्ण के थे। वहीं, सूर्यदेव ने अपने पुत्र को देखा, तो वे दंग रह गए। उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि इतना काला बालक उनका पुत्र हो सकता है।

    पिता-पुत्र के बीच कड़वाहट की शुरुआत

    गुस्से में आकर सूर्यदेव ने छाया पर आरोप लगाया कि यह बालक उनका नहीं है। उन्होंने न केवल बालक को अपनाने से इनकार कर दिया, बल्कि मां छाया का भी अपमान किया। अपने और अपनी माता के इस अपमान को देखकर बालक शनि को बहुत गुस्सा आया।ऐसी मान्यता है कि शनि देव में जन्म से ही अद्भुत शक्तियां थीं। उन्होंने अपने पिता सूर्यदेव की ओर कुदृष्टि से देखा। शनि देव की उस शक्तिशाली दृष्टि के प्रभाव से सूर्यदेव का सुनहरा शरीर काला पड़ गया और उनके घोड़े रूक गए। सूर्यदेव भयभीत हो गए और उन्हें समझ नहीं आया कि उनके साथ क्या हो रहा है। अंत में, उन्हें भगवान शिव से मदद मांगी।

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    भगवान शिव का न्याय

    भगवान शिव ने सूर्य देव को समझाया कि शनि उनका ही पुत्र है। शनि का काला रंग उनकी माता की तपस्या की शक्ति का प्रतीक है। सूर्यदेव को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने माफी मांगी, जिसके बाद उन्हें अपना पुराना रूप वापस मिला। लेकिन पिता द्वारा माता का अपमान किए जाने की बात शनि देव कभी नहीं भूले, इसीलिए आज भी ज्योतिष में सूर्य और शनि को एक-दूसरे का शत्रु माना जाता है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।