शादी में गठबंधन की परंपरा: शास्त्रों के आधार पर किसे बांधना चाहिए वर-वधू का गठबंधन?
हिंदू विवाह में गठबंधन केवल वस्त्रों को बांधना नहीं, बल्कि दो आत्माओं और परिवारों के मिलन का पवित्र प्रतीक है। ...और पढ़ें
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गठबंधन बांधने की जिम्मेदारी परिवार के विशेष सदस्यों को होती है (Picture Credit- magnific)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू विवाह केवल दो व्यक्तियों का सामाजिक मिलन नहीं, बल्कि हिंदु धर्म में किए जाने वाले 16 संस्कारों में से एक पवित्र संस्कार माना जाता है। विवाह की प्रत्येक रस्म का अपना विशेष धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व होता है। इन्हीं महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है गठबंधन। यह रस्म केवल दूल्हा और दुल्हन के वस्त्रों को बांधने तक सीमित नहीं होती, बल्कि माना जाता है कि यह दो आत्माओं, दो परिवारों और दो जीवन यात्राओं के एक साथ जुड़ने का प्रतीक मानी जाती है। विवाह के बाद वर और वधू एक-दूसरे के सुख-दुख, कर्तव्यों और जिम्मेदारियों के समान भागीदार बनते हैं। गठबंधन की रस्म इन्हें बातों को दर्शाती है।
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, गठबंधन सनातन वैवाहिक परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। इस रस्म के दौरान वर और वधू के वस्त्रों को एक पवित्र गांठ में बांधा जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि अब दोनों का जीवन एक-दूसरे से हमेशा के लिए जुड़ गया है। यह बंधन प्रेम, विश्वास, समर्पण और पारिवारिक एकता का संदेश देता है।
शास्त्रों के अनुसार किसे है गठबंधन बांधने का अधिकार?
हिंदू शास्त्रों और लोक परंपराओं में गठबंधन बांधने की जिम्मेदारी परिवार के विशेष सदस्यों को दी गई है। परंपरागत मान्यता के अनुसार, इस पवित्र रस्म को निभाने का प्रथम अधिकार वर की बहन या बुआ को प्राप्त होता है। माना जाता है कि परिवार की इन महिलाओं के हाथों से बंधी यह गांठ केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि उसमें परिवार का स्नेह, अपनापन और आशीर्वाद भी समाहित रहता है।
यदि किसी कारणवश वर की बहन या बुआ उपस्थित न हो, तो कई परिवारों में यह रस्म किसी अन्य निकट संबंधी महिला, जैसे बड़ी बहन, चाची या परिवार की वरिष्ठ महिला द्वारा भी निभाई जाती है। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में इस परंपरा के स्वरूप में कुछ भिन्नताएं देखने को मिल सकती हैं।
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गठबंधन का आध्यात्मिक महत्व
गठबंधन की रस्म यह दर्शाती है कि विवाह के बाद पति-पत्नी केवल दो व्यक्ति नहीं रहते, बल्कि एक-दूसरे के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन जाते हैं। यह गांठ उनके बीच अटूट विश्वास, पारस्परिक सम्मान और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प का प्रतीक मानी जाती है।

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अत: गठबंधन केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि समाज के सामने एक महत्वपूर्ण संदेश भी प्रस्तुत करता है। यह रस्म इस बात की सार्वजनिक घोषणा करती है कि अब वर और वधू का जीवन एक हो चुका है और वे हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ निभाने का वचन ले चुके हैं।
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