कौन थीं भगवान श्रीकृष्ण की 16108 रानियां? जानें इनसे जुड़े रहस्य
भगवान श्रीकृष्ण की 16108 रानियों थीं। यह विवाह शारीरिक नहीं, बल्कि भक्तों के प्रति भगवान के अपार प्रेम और उनकी रक्षा का प्रतीक है, जिसमें श्रीकृष्ण ने ...और पढ़ें

Lord Krishna: श्रीकृष्ण की 8 प्रमुख पटरानियां।
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भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को लीला कहा जाता है
श्रीकृष्ण की 16,108 रानियां थीं
भगवान श्रीकृष्ण की 8 पटरानियों को अष्टभार्या कहा जाता है
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। Lord Krishna: भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को लीला कहा जाता है, क्योंकि उनके हर फैसले के पीछे एक गहरा रहस्य छिपा होता है। अक्सर लोग श्रीकृष्ण की 16108 रानियों के बारे में सुनकर हैरान रह जाते हैं, लेकिन क्या किसी को इसके पीछे के त्याग और न्याय की कथा के बारे में पता है? आइए जानते हैं श्रीकृष्ण की इन रानियों के साथ विवाह की कथा और वजह।

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श्रीकृष्ण की 8 प्रमुख पटरानियां
श्रीकृष्ण की 16,108 रानियों में 8 पटरानियां मुख्य मानी जाती हैं, जिन्हें 'अष्टभार्या' कहा जाता है। इनके नाम इस प्रकार हैं -
- रुक्मिणी: जो साक्षात देवी लक्ष्मी का अवतार थीं।
- सत्यभामा: सत्राजित की पुत्री, जो अपनी वीरता के लिए प्रसिद्ध थीं।
- जाम्बवती: जाम्बवंत जी की पुत्री।
- कालिंदी: सूर्य देव की पुत्री और यमुना नदी का स्वरूप।
- मित्रबिन्दा: उज्जैन की राजकुमारी।
- सत्या: कोसल की राजकुमारी।
- भद्रा: कैकेय देश की राजकुमारी थीं।
- लक्ष्मणा: मद्र देश की राजकुमारी।
क्यों किया 16108 रानियों से विवाह?
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, नरकासुर ने अपनी शक्ति के घमंड में आकर देवताओं और राजाओं की 16,100 कन्याओं को बंदी बना लिया था। उसने उन्हें अपने महल में कैद कर रखा था और उनके साथ दुर्व्यवहार करता था। श्रीकृष्ण ने सत्यभामा की सहायता से नरकासुर का वध किया और उन सभी कन्याओं को मुक्त कराया। जब ये कन्याएं अपने घर लौटीं, तो समाज ने उन्हें अपनाने से इनकार कर दिया, क्योंकि वे एक राक्षस के पास रही थीं। तब उन कन्याओं को सामाजिक सम्मान और सुरक्षा देने के लिए श्रीकृष्ण ने उन सभी कन्याओं से विवाह किया और उन्हें अपनी रानी का दर्जा दिया।
विवाह से जुड़े रहस्य
पुराणों के अनुसार, श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से 16,108 रूप धारण किए थे। ताकि वे हर रानी के साथ एक साथ महल में रह सकें।
भक्त मानते हैं कि ये कन्याएं वास्तव में त्रेतायुग की वे गोपियां और ऋषि थे, जिन्होंने भगवान को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी।
यह विवाह शारीरिक नहीं, बल्कि भक्त के प्रति भगवान का अपार प्यार है। साथ ही यह ये भी दिखाता है कि भगवान अपने भक्तों की रक्षा सदैव करते हैं।
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