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    Makar Sankranti 2026: कब है मकर संक्रांति? इस दिन क्यों खाई जाती है खिचड़ी? जानें महत्व

    By Digital DeskEdited By: Vaishnavi Dwivedi
    Updated: Mon, 12 Jan 2026 09:15 AM (IST)

    मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) 14 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी, जब सूर्य धनु से मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होता है। यह दान, पुण्य और नए आरंभ का ...और पढ़ें

    Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति कथा।

    Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति कथा।

    HighLights

    1. मकर संक्रांति का दिन बेहद शुभ माना जाता है

    2. यह दिन सूर्य देव को समर्पित है

    3. इस दिन पूजा-पाठ और दान-पुण्य का विधान है

    दिव्या गौतम, एस्ट्रोपत्री। हर वर्ष की तरह 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, इसी दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण का आरंभ होता है। मकर संक्रांति को केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं माना जाता, बल्कि इसे दान, पुण्य, संयम और नए आरंभ का विशेष पर्व कहा गया है।

    उत्तर भारत के कई राज्यों में इस दिन खिचड़ी बनाना, खाना और दान करना एक पुरानी परंपरा है। यही कारण है कि मकर संक्रांति का नाम आते ही खिचड़ी का स्मरण स्वतः हो जाता है। परंपरा के पीछे केवल स्वाद नहीं, बल्कि गहरी आस्था और सामाजिक भावना जुड़ी मानी जाती है।

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    AI Generated

    बाबा गोरखनाथ से जुड़ी धार्मिक मान्यता

    धार्मिक कथाओं में मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा का संबंध बाबा गोरखनाथ से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि एक समय कठिन परिस्थितियों और आक्रमणों के कारण योगी और साधु नियमित रूप से भोजन नहीं बना पाते थे। ऐसे समय में बाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और मौसमी सब्जियों को एक साथ पकाने की सलाह दी। यह भोजन कम समय में तैयार हो जाता था और लंबे समय तक ऊर्जा देता था। धीरे धीरे यह साधारण और पौष्टिक भोजन साधु संतों से समाज तक पहुंचा और मकर संक्रांति से जुड़ गया। तभी से इस दिन खिचड़ी बनाना और ग्रहण करना शुभ माना जाने लगा।

    ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से महत्व

    ज्योतिष के अनुसार, मकर संक्रांति पर सूर्य का मकर राशि में प्रवेश एक शुभ परिवर्तन माना जाता है। इस दिन किया गया दान विशेष फल देता है। खिचड़ी में प्रयुक्त चावल, दाल और घी को सात्विक आहार माना गया है, जो सूर्य को अर्पित करने के लिए उपयुक्त समझा जाता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता आती है। यही कारण है कि स्नान के बाद खिचड़ी का दान कर उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करने की परंपरा बनी। यह धार्मिक भावना लोगों को संयम और सेवा का संदेश भी देती है।

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    स्वास्थ्य और सामाजिक संदेश

    मकर संक्रांति के समय ठंड अपने चरम पर होती है। ऐसे मौसम में खिचड़ी शरीर के लिए लाभकारी मानी जाती है। दाल और चावल का संतुलन शरीर को आवश्यक ऊर्जा देता है, जबकि घी पाचन शक्ति को मजबूत करता है। यह भोजन हल्का, सुपाच्य और पोषण से भरपूर होता है। इसके साथ ही खिचड़ी का दान सामाजिक समरसता का प्रतीक माना गया है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन या सामग्री देने से सहयोग और करुणा का भाव बढ़ता है। कुल मिलाकर, मकर संक्रांति पर खिचड़ी खाने की परंपरा आस्था, स्वास्थ्य और सामाजिक मूल्यों का सुंदर संगम है, जो इस पर्व को विशेष अर्थ देता है।

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    लेखक: दिव्या गौतम, Astropatri.com अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए hello@astropatri.com पर संपर्क करें।