भगवान कल्कि के गुरु कौन होंगे और वे किस अस्त्र से करेंगे पापियों का नाश? ज्योतिषी से जानें सबकुछ
कल्कि पुराण के अनुसार, जब धरती पर पाप बढ़ेगा, तो भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे। ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार, भगवान परशुराम उनके गुरु होंगे और मह ...और पढ़ें

कब लेंगे भगवान कल्कि अवतार? (Picture Credit- AI Generated)

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में कल्कि पुराण को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। इस ग्रंथ में कलियुग के बारे में बताया गया है। कल्कि पुराण के अनुसार, जब धरती पर पाप, अधर्म और अत्याचार अधिक बढ़ जाएगा, तो भगवान विष्णु अपना दसवां और अंतिम अवतार भगवान कल्कि के रूप में अवतरित होंगे।
क्या आप जानते हैं कि भगवान कल्कि के गुरु कौन होंगे और वे किस अस्त्र से करेंगे पापियों का नाश? अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए आपको एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा के अनुसार बताते हैं कौन होंगे भगवान कल्कि के गुरु और वे किस अस्त्र से करेंगे पापियों का नाश।
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कल्कि अवतार का रहस्य
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा बताते हैं कि जब अधर्म की सीमा पार होगी, तब देवदत्त घोड़े पर सवार होकर निष्कलंक अवतार आएगा। कल्कि पुराण के अनुसार, कलयुग के अंत में भगवान विष्णु के 10वें अवतार 'कल्कि' के गुरु अमर भगवान परशुराम होंगे।
भगवान परशुराम से प्राप्त होगी शिक्षा
इस पावन कथा में भगवान के गुरु और उनकी शिक्षा का विशेष महत्व बताया गया है:
गुरु का मार्गदर्शन: कलयुग के अंत में जब अधर्म चरम पर होगा, तब भगवान कल्कि को भगवान परशुराम का मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
दिव्य ज्ञान की प्राप्ति: अमर भगवान परशुराम ही उनके गुरु होंगे जो उन्हें धर्म की रक्षा के लिए तैयार करेंगे।
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महादेव का दिव्य खड्ग बनेगा अस्त्र
पापियों के संहार और अधर्म के नाश के लिए भगवान एक विशेष अस्त्र धारण करेंगे:
शिव जी का उपहार: महादेव द्वारा दिए गए रत्नजड़ित खड्ग (तलवार) को भगवान कल्कि अपना मुख्य अस्त्र बनाएंगे।
पापियों का संहार: देवदत्त नाम के श्वेत घोड़े पर सवार होकर वे इसी दिव्य तलवार से संसार के समस्त पापियों का नाश करेंगे।
कब लेंगे भगवान कल्कि अवतार?
कल्कि पुराण के अनुसार, जब धरती पर पाप, अधर्म, अन्याय और क्रूरता जैसे पाप अधिक बढ़ जाएंगे, तो भगवान कल्कि घोड़े पर सवार होकर अवतार लेंगे। इसके बाद वे धरती पर बढ़ रहे पापों को खत्म करेंगे और सतयुग की स्थापना करेंगे।मनुष्य के भीतर से संस्कार खत्म हो जाएंगे जाएंगे और गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा टूट जाएगी जहां शिष्य अपने गुरु के उपदेशों की घोर अवहेलना करने लगेंगे।
अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।