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गणपति बप्पा के साथ क्यों बोला जाता है 'मोरिया'? जानिए भक्त गोसावी की पौराणिक कथा

Published: Fri, 11 Sep 2026 10:12 AM (IST)Updated: Tue, 15 Sep 2026 12:19 PM (IST)

गणपति बप्पा मोरिया में 'मोरिया' शब्द भगवान गणेश के परम भक्त मोरिया गोसावी से संबंधित है। यह शब्द मोरिया गोसावी ...और पढ़ें

गणपति बप्पा मोरया का अर्थ और उसके पीछे की कथा (Picture Credits- AI Images)

गणपति बप्पा मोरया का अर्थ और उसके पीछे की कथा (Picture Credits- AI Images)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के साथ गणपति बप्पा का स्वागत हो चुका है। गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश का एक लोकप्रिय मंत्र काफी बोला जाता है। यह मंत्र है 'गणपति बप्पा मोरिया', जो उनकी स्तुति और भक्ति करने लिए गाया जाता है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि, 'गणपति बप्पा मोरिया' में 'मोरिया' शब्द का क्या मतलब है?

गौर करें तो 'गणपति' और 'बप्पा' दोनों ही शब्द भगवान गणेश से जुड़े माने जाते हैं, वहीं मोरिया नाम उनसे सीधे तौर पर नहीं जुड़ा है, बल्कि यह 'मोरिया गोसावी' से संबंधित है, जिन्हें भगवान गणेश का सबसे प्रिय भक्त माना जाता था। उनकी कथा महाराष्ट्र के पुणे के पास चिंचवड और मोरगांव स्थित गणेश जी के पवित्र मंदिर से जुड़ी है।

मोर्या गोसावी की कहानी

मोरिया गोसावी भगवान गणेश के परम भक्त के रूप में जाने जाते हैं और वे 14वीं शताब्दी में रहते थे। मोरिया गोसावी का अधिक समय चिंचवाड़ में बिता , जहां वे पूजा-अर्चना करते थे।

ऐसा माना जाता है कि गणेश चतुर्थी के दौरान हर साल मोरिया गोसावी भगवान गणेश को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए चिंचवाड़ से मोरगांव तक की काफी दूरी तय करनी पड़ती थी। यह यात्रा किसी भी ऐसे भक्त के लिए सामान्य यात्रा से कहीं अधिक है, जिसने अपना पूरा जीवन भगवान गणेश को समर्पित कर दिया है। यह आस्था और समर्पण की अभिव्यक्ति थी।

जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती गई, यह काम उनके लिए और भी ज्यादा मुश्किल होता गया। माना जाता है कि, उनकी ऐसी स्थिति को देखते हुए भगवान गणेश ने उन्हें सपने में दर्शन दिए।

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जब गणेश जी अपने भक्त से मिलने गए

पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान गणेश ने मौर्य गोसावी को कहा था कि उन्हें नदी में उनकी प्रतिमा मिलेगी। अगले दिन मौर्य गोसावी नदी पर गए और नहाने के दौरान उन्हें भगवान गणेश की मूर्ति मिली।

मोरिया गोसावी के लिए यह पल बेहद आध्यात्मिक था, क्योंकि अब उन्हें मोरगांव की लंबी यात्रा करने की जरूरत नहीं थी, क्योंकि पौराणिक किंवदंती के मुताबिक गणेश मोरिया गोसावी के सामने प्रकट हुए थे। इस घटना ने मौर्य गोसावी और भगवान गणेश के बीच के बंधन को और भी मजबूत कर दिया।

भक्त 'मौर्या' क्यों कहते हैं?

यहीं से इस प्रसिद्ध मंत्र को अपना गहरा अर्थ मिलता है। मोरिया गोसावी को भगवान गणेश जी का एक साधारण भक्त माना जाता था, लेकिन धीरे-धीरे उनका नाम चिंचवाड़ और आसपास के हिस्सों में गणेश जी की परम भक्ति से जुड़ गया।

ऐसा माना जाता है कि एक प्रसिद्ध भक्ति परंपरा में मोरिया गोसावी को 'मोरिया' कहकर पुकारा जाता है और उनकी प्रतिक्रिया में उन्हें 'मंगलमूर्ति' भी कहा जाता है, जो भगवान गणेश के शुभ रूप के नामों में से एक है। इस तरह श्रद्धा से प्रेरित होकर प्रसिद्ध वाक्यांश गढ़ा गया- मंगलमूर्ति मोरिया!

भक्तों के लिए 'गणपति बप्पा मोरिया' सिर्फ एक धार्मिक नारा ही नहीं, बल्कि एक ऐसा नाम है जो भगवान गणेश के प्रति भक्त की निष्ठा को दर्शाता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।