भगवान शिव शरीर पर क्यों लगाते हैं भस्म? जानिए कैसे शुरू हुई महादेव की यह अनोखी परंपरा
भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं, इसके पीछे माता सती से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। यह भस्म पवित्रता, मोह-माया से मुक्ति और मृत्यु को जीवन का ...और पढ़ें

महादेव के भस्म लगाने की क्या है वजह? (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भगवान शिव का स्वरूप अन्य सभी देवी-देवताओं से बिल्कुल भिन्न है। महादेव अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं। यह एक उनका खास शृंगार है। भस्म को भगवान शिव का आभूषण माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की भस्म को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। उनके भस्म लगाने से यह बेहद खास सीख मिलती है कि मृत्यु कोई भयभीत करने वाला अंत नहीं, बल्कि जीवन का एक सत्य है, जिसे हर व्यक्ति को स्वीकार करना ही पड़ता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव अपने शरीर पर भस्म क्यों लगाते हैं। अगर नहीं पता, तो ऐसे में आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में।
भगवान शिव और भस्म का क्या है संबंध
पौराणिक कथा के अनुसार, जब माता सती ने प्रजापति दक्ष के यज्ञ में जाने का मन बना लिया, तो भगवान शिव ने माता सती को यज्ञ में जाने से मना कर दिया, लेकिन इसके बाद भी माता सती ने भगवान शिव की बात को नहीं माना। जब माता सती यज्ञ में पहुंची, तो उन्होंने प्रजापति दक्ष से यज्ञ में निमंत्रण न देने की वजह पूछी, तो प्रजापति दक्ष भगवान शिव के लिए कटु वचन बोलने लगे।

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इसलिए लगाते हैं महादेव भस्म
माता सती ने अपमानजनक बातें सुनकर यज्ञ की अग्नि में कूद गई। इसके बाद भगवान शिव अधिक क्रोधित हुए और उन्होंने माता सती के वियोग में मोह-माया का त्याग कर दिया। भगवान शिव माता सती के शव को लेकर धरती से आकाश में घूम रहे थे। भगवान विष्णु से महादेव की यह स्थिति देखी नहीं गई, तो उन्होंने माता सती के शव छू कर भस्म बना दिया। इसके बाद भगवान शिव ने उस भस्म को माता सती की याद में अपने शरीर पर लगा ली। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तब से ही भगवान अपने शरीर पर भस्म लगाने लगे।
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भस्म का शिव पुराण में मिलता है वर्णन
भगवान शिव के शरीर पर भस्म लगाने का वर्णन शिव पुराण के विद्येश्वर संहिता और रुद्र संहिता में मिलता है।
मिलती है ये खास सीख
भगवान शिव के शरीर पर लगी भस्म संकेत देती है कि भगवान शिव भौतिक सुखों और मोह-माया से मुक्त हैं।
इसके अलावा यह भी संकेत मिलता है कि कोई व्यक्ति राजा हो या फिर गरीब मृत्यु के बाद उसके शरीर को श्मशान की राख में मिल जाना है।
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