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    माता लक्ष्मी को चंचला क्यों कहा जाता है, धन की देवी से जुड़ी यह खास मान्यता क्या है?

    Updated: Sat, 06 Jun 2026 09:30 AM (IST)

    पढ़ें माता लक्ष्मी को चंचला कहने के पीछे की धार्मिक मान्यता, शास्त्रीय कारण और धन-समृद्धि से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें। ...और पढ़ें

    माता लक्ष्मी से जुड़ी रोचक बातें (AI-Generated Image)

    माता लक्ष्मी से जुड़ी रोचक बातें (AI-Generated Image)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। माता लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है। हर व्यक्ति चाहता है कि मां लक्ष्मी की कृपा उसके घर और परिवार पर बनी रहे। लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि मां लक्ष्मी को "चंचला" क्यों कहा जाता है? धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं में इसके पीछे एक विशेष कारण बताया गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जिस घर में स्वच्छता, परिश्रम, दान-पुण्य और धर्म का पालन होता है मां लक्ष्मी वहीं निवास करती हैं। जिस घर में कलह, अहंकार, आलस और अनैतिक कार्य बढ़ जाते हैं, वह घर लक्ष्मी का स्थायी निवास नहीं माना जाता। इसी कारण उन्हें चंचला कहा गया है।

    व्यक्ति के चंचल मन से क्यों की गई मां लक्ष्मी की तुलना? 

    संस्कृत भाषा में "चंचला" का अर्थ होता है, जो एक स्थान पर स्थिर न रहे, जैसे हमारा मन। आपने अक्सर सुना होगा कि मन बहुत चंचल होता है। हमेशा गतिशील रहता है। माता लक्ष्मी को यह नाम देने के पीछे की वजह यह है कि धन और संपत्ति को कभी भी स्थायी नहीं माना गया है। जीवन में धन का आना और जाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। आज जो व्यक्ति धनवान है, वह भविष्य में आर्थिक चुनौतियों का सामना कर सकता है। वहीं, कठिन परिस्थितियों में रहने वाला व्यक्ति भी समय के साथ समृद्ध बन सकता है।

    बात करें पुराणों की तो वहां भी उल्लेख मिलता है कि समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। उन्होंने भगवान विष्णु को अपना पति चुना और क्षीर सागर में वास करने लगीं। भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता माने जाते हैं और संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं। इसलिए मान्यता है कि लक्ष्मी भी उसी स्थान पर अधिक समय तक रहती हैं जहां संतुलन, अनुशासन और सद्गुण मौजूद हों।

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    Lakshmi maa puja

    (AI-Generated Image)

    लक्ष्मी प्राप्ति के स्वर्णिम सूत्र

    • नियमित रूप से घर की पहली रोटी गाय को और अंतिम रोटी कुत्ते को दें तो आपके भाग्य का द्वार खुलने से कोई नहीं रोक सकता।
    • नियमित रूप से हर शुक्रवार को श्रीसूक्त या लक्ष्मी सूक्त का पाठ किया जाए तो वहां मां लक्ष्मी का स्थाई रूप से वास होता है।
    • रोजाना सुबह उठकर सर्वप्रथम गृहलक्ष्मी अगर मुख्य द्वार पर एक लोटा जल डालें तो मां लक्ष्मी के आने का मार्ग प्रशस्त होता है।
    • आर्थिक संपन्नता के लिए नियमित रूप से पीपल के वृक्ष में जल अवश्य दें।
    • घर में पूजा करते समय जो घी का दीपक जलाया जाता है उसमें रुई की बत्ती के स्थान पर मौली का इस्तेमाल करें क्योंकि मां लक्ष्मी को लाल रंग अधिक प्रिय है।

    यह भी पढ़ें- मां लक्ष्मी की पूजा में न करें ये गलतियां, ऐसे करें पूजा, मिलेगा मां का आशीर्वाद

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।