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अंतिम संस्कार के समय मृतक के मुंह में सोने का टुकड़ा रखने की परंपरा क्यों है? गरुड़ पुराण में छिपा है रहस्य

Updated: Tue, 25 Aug 2026 03:04 PM (IST)

हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के दौरान मृतक के मुख में सोने का टुकड़ा रखने की परंपरा है। गरुड़ पुराण ...और पढ़ें

गरुड़ पुराण का रहस्य: मृतक के मुख में सोना रखना जरूरी क्यों है? (Picture Credit: AI Generated)

गरुड़ पुराण का रहस्य: मृतक के मुख में सोना रखना जरूरी क्यों है? (Picture Credit: AI Generated)

HighLights

  1. आत्मा की शुद्धि और मोक्ष प्राप्ति के लिए सोना।

  2. सांसारिक मोह-माया से मुक्ति दिलाता है यह कर्म।

  3. गरुड़ पुराण में वर्णित है यह पवित्र परंपरा।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के कई नियम बनाए गए हैं और उनका पालन जरूरी माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का पालन करता है तो मृतक की आत्मा को मुक्ति मिलने के साथ उनके वंशजों के जीवन में भी खुशहाली आती है।

गरुड़ पुराण में भी कई बातों का जिक्र किया गया है और उसके अनुसार ही मृत व्यक्ति को मुखाग्नि दी जाती है। जिस प्रकार मृतक को स्नान कराने के बाद नए कपड़े पहनाए जाते हैं और यदि कोई सुहागिन स्त्री का अंतिम संस्कार किया जाता है तब उसका सोलह श्रृंगार किया जाता है।

यही नहीं मृतक के मुख में तुलसी और गंगाजल रखने की परंपरा का पालन भी सदियों से किया जा रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं एक और रस्म के बारे में जिसमें मृत व्यक्ति के मुख में सोने का टुकड़ा रहा जाता है। आइए आपको बताते हैं मृतक के मुख में सोने का टुकड़ा रखने के पीछे की मान्यता के बारे में क्या कहता है गरुड़ पुराण?

मृतक के मुख में सोने के टुकड़ा क्यों रखते हैं?

मृतक के मुंह में सोने का टुकड़ा उसे चिता पर लेटाने से पहले रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सोना एक पवित्र और शुभ धातु मानी जाती है इसलिए, कहा जाता है कि मृतक के मुख में सोना रखने से आत्मा शुद्ध होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो उसके परिवार के लोग ईश्वर से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं। ऐसे में मुख में सोना रखने का एक मात्र उद्देश्य मृतक को सांसारिक मोह-माया से मुक्ति दिलाना होता है। सोना एक ऐसी धातु है ही मृत आत्मा के लिए स्वर्ग के द्वार खोलती है, इसी वजह से यह मृत व्यक्ति के लिए अंतिम यात्रा को आसान बनाती है।

गरुड़ पुराण में लिखी है यह बात

यदि हम गरुड़ पुराण की मानें तो हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के समय मुख में तुलसी, गंगाजल और सोना रखने से पवित्रता बनी रहती है।

मृतक के शरीर की अशुध्दियां दूर हो सकती हैं और स्वर्ण को एक ऐसी धातु माना जाता है जो कि अग्नि में तपने के बाद भी अपनी पवित्रता नहीं खोता है, इसलिए मृतक के मुख में सोना धातु का एक छोटा सा टुकड़ा जरूर रखा जाता है।

इससे मृत आत्मा को सम्मान भी मिलता है। इसके साथ ही, मृत्यु के समय भौतिक शरीर पंचतत्वों में विलीन होते समय अशुद्ध न हो जाए, इसलिए सोना मुख में रखा जाता है।

मृतक को पापों से मुक्ति मिलती है

यदि मृत व्यक्ति के मुख में सोने का एक टुकड़ा रखा जाता है तो उसे जीवन पर्यन्त किए गए किसी भी पाप से मुक्ति मिल सकती है और इसे मोक्ष पाने का माध्यम माना जाता है। यदि नहीं ऐसा करने से यम का भय भी दूर होता है और आत्मा की आगे की यात्रा आसान हो जाती है।

गरुड़ पुराण में बताया गया है कि व्यक्ति के मुख में रखा हुआ सोने का एक छोटा सा टुकड़ा मोक्ष दिलाने और प्रेत योनि से बचाने में मदद करता है।

मृतक के मुख में सोने का टुकड़ा रखना सिर्फ एक रस्म नहीं है बल्कि आत्मा के लिए मुक्ति का द्वार भी खोलने में मदद करती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।