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    अपनी खुशियों का ढिंढोरा पीटने से क्यों मना करते हैं हिंदू शास्त्र? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह

    Updated: Fri, 26 Jun 2026 10:05 AM (IST)

    हिंदू शास्त्रों और रामचरितमानस के अनुसार, अपनी खुशियों का अत्यधिक प्रचार-प्रसार करने से वे नजर लग सकती हैं और सुख-सौभाग्य में बाधा आ सकती है। ...और पढ़ें

    खुशियों को जग जाहिर करने से क्यों बचना चाहिए? (Picture Credit- AI Generated)

    खुशियों को जग जाहिर करने से क्यों बचना चाहिए? (Picture Credit- AI Generated)

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    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू शास्त्रों में सलाह दी जाती है कि, कभी भी अपनी खुशियों का ढिंढोरा नहीं पीटना चाहिए, जो भी लोग ऐसा करते हैं उनकी खुशियों को नजर लग सकती है, क्योंकि हर कोई आपकी खुशी में खुश नहीं होता है।

    रामचरित मानस के मुताबिक, खुशियां का अधिक प्रचार-प्रसार करना आपके सुख और सौभाग्य में बाधा उत्पन्न कर सकता है, इसलिए भूलकर भी अपनी उपलब्धियों को जग जाहिर न करें उन्हें गुप्त या संयमित रखना जरूरी माना गया है।

    रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज कहते हैं कि,

    हरि हर जस राकेस राहु से। पर अकाज भट सहसबाहु से।।
    जे पर दोष लखहिं सहसाखी। पर हित घृत जिन्ह के मन माखी।।

    अर्थात्- इस श्लोक के माध्यम से गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज कहते हैं कि, जो हरि और हर के यश रूपी पूर्णिमा के चंद्रमा के लिए राहु की तरह हैं (मतलब जहां कहीं भी भगवान विष्णु और शंकर के यश की कीर्ति होती है, उसी में वे बाधा देते हैं) और दूसरों की बुराई करने में सहस्रबाहु की ही तरह वीर हैं। जो दूसरों के दोषों को कई आंखों से देखता है और दूसरों के हित रूपी घी के लिए जिनका मन मक्खी की तरह है (मतलब जिस तरह मक्खी घी में गिरकर उसे खराब कर देती है और खुद भी मर जाती है, उस तरह दुष्ट लोग दूसरों के बने- बनाए काम को अपनी हानि से बिगाड़ भी देते हैं।

    अपनी खुशियों को गुप्त क्यों रखना चाहिए

    अपनी खुशियों को जग जाहिर नहीं करनी चाहिए? 

    श्लोक का असल मतलब?

    आज के समय में कुछ लोगों के पास आपकी कमियां आपके दोष को देखने के लिए हजार आंखें होती हैं, ये मक्खी की तरह होते हैं, जिनका काम ही आपकी खुशी में बाधा डालकर उसे खराब करना होता है।

    इसे कुछ इस तरह से समझने की कोशिश करें, मान लीजिए आपकी अच्छी नौकरी लगी, तो कुछ लोग कहेंगें सैलरी कम है, अगर गाड़ी खरीदी तो कहेंगे माईलेज कम देती है। कुल मिलाकर आप जितना अच्छा इनको बताएंगे वो उसमें कमियां ढूंढने लगेंगे ताकि आपको अपने फैसले पर सेल्फ-डाउट महसूस होने लगे।

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    अब ऐसे में आप घी को मक्खियों से कैसे बचाएंगे, सीधा जबाव है कि उसे ढककर, कहने का मतलब जितना हो सके अपनी खुशियों को गुप्त रखें। अगर किसी को बात भी दिया तो एक सीमा जरूर बनाए, वरना आपको लगेगा लोग आपकी खुशी से खुश हो रहे हैं, लेकिन असल में उनकी ईर्ष्या आपकी खुशी में बाधा डाल सकती है।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।