16 दिनों के श्राद्ध पक्ष की इंदिरा एकादशी क्यों है सबसे खास? पितरों की मुक्ति से जुड़ा है रहस्य
इंदिरा एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है, क्योंकि यह पितृ पक्ष में आती है और पितरों की आत्मा ...और पढ़ें

पितृ पक्ष में पड़ने वाली इंदिरा एकादशी

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हर महीने में 2 बार आने वाली एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के हिसाब से सभी एकादशी व्रत की ही तरह आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली 'इंदिरा एकादशी' का भी विशेष महत्व है।
यह एक मात्र ऐसी एकादशी है जो पितृ पक्ष में आती है। माना जाता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को पितृ पक्ष (Pitru Paksha 2026) में श्राद्ध पक्ष के समान फलों की प्राप्ति होती है।
इसी वजह से इंदिरा एकादशी का व्रत अन्य एकादशियों के व्रत की तुलना में बेहद खास माना जाता है। जो लोग किसी भी वजह से पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध न कर पाए हों, उन्हें खासतौर पर एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए।
इंदिरा एकादशी 2026 व्रत तिथि (Indira Ekadashi 2026 Date)
इंदिरा एकादशी का व्रत हर वर्ष आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर रखा जाता है। इस साल यह व्रत 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार के दिन रखा जाएगा। इंदिरा एकादशी को 'श्राद्ध एकादशी' और'पितृमोक्षदा एकादशी' के नाम से जाना जाता है।
इंदिरा एकादशी 2026 पूजा मुहूर्त
इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार के दिन रखा जाएगा।
एकादशी तिथि का प्रारंभ- 6 अक्टूबर 2026 को सुबह 2 बजकर 7 मिनट पर
एकादशी तिथि का समापन- 7 अक्टूबर 2026 को रात 12 बजकर 34 मिनट पर
इंदिरा एकादशी 2026 का पारण कब?
द्रिक पंचांग के हिसाब से इंदिरा एकादशी 2026 का पारण 7 अक्टूबर 2026 को सुबह 6 बजकर 17 मिनट से लेकर 8 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।
एकादशी के व्रत को समाप्त करने को ही 'पारण' कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना जरूरी माना गया है। अगर द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो गई हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय होने से पहले ही किया जाता है।
पितृ पक्ष 2026 में इंदिरा एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी का व्रत रखने से पितरों की आत्मा को यमलोक की यातनाओं से मुक्ति मिलने के साथ बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
इसके अलावा इंदिरा एकादशी के व्रत के प्रभाव से पू्र्वजों के समस्त पापों का नाश होने के साथ परिवार पर पितरों की विशेष कृपा बनी रहती है। सभी एकादशियों में एकमात्र इंदिरा एकादशी ही पितृ पक्ष में आती है, जिस वजह से इस व्रत का पुण्य कई गुना बढ़कर मिलता है। इसके साथ ही पितरों की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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