पूजा से पहले आचमन करने का क्या महत्व है? पढ़ें इसकी सही विधि, धार्मिक मान्यता और शुभ फल
पूजा से पहले या बाद में, कब करना चाहिए आचमन करने का धार्मिक महत्व, सही विधि और नियम। शास्त्रों के अनुसार आचमन से शरीर और मन शुद्ध होता है। पढ़ें इसे क ...और पढ़ें

पूजा से पहले आचमन क्यों है जरूरी। (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में किसी भी पूजा, जप, हवन या धार्मिक अनुष्ठान से पहले आचमन करने की परंपरा है। बहुत से लोगों इसे बारे में जानकारी भी नहीं होगी कि पूजा से पहले आचमन करना कितना महत्वपूर्ण होता है। आचमन का महत्व मुख्य रूप से मनुस्मृति तथा भविष्य पुराण में वर्णित है।
मनुस्मृति के द्वितीय अध्याय के 60वें श्लोक में स्पष्ट निर्देश है "त्रिराचामेदपः पूर्वम्" अर्थात किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या पूजा से पहले व्यक्ति को तीन बार आचमन जरूर करना चाहिए। इससे शरीर, मन और वाणी की शुद्धि होती है। ऐसा विश्वास है कि आचमन करने से व्यक्ति बाहरी और आंतरिक रूप से पवित्र होकर भगवान की पूजा के लिए तैयार होता है। चलिए हम आपको आज आचमन के महत्व और इसे करने की सही विधि के बारे में विस्तार से बताते हैं।
आचमन क्या है?
आचमन एक धार्मिक शुद्धिकरण की प्रक्रिया है, जिसमें शुद्ध जल को मंत्रों के साथ ग्रहण किया जाता है और शरीर के कुछ अंगों का स्पर्श किया जाता है। मान्यता है कि इससे मन, वचन और कर्म की पवित्रता बढ़ती है। किसी भी पूजा, जप, यज्ञ या धार्मिक संस्कार से पहले आचमन करना शुभ माना जाता है।
आचमन के लिए आवश्यक सामग्री
आचमन करने के लिए बहुत अधिक सामग्री की जरूरत नहीं होती। इसके लिए केवल 5 चीजें ही चाहिए होती हैं:
- शुद्ध जल
- तांबे का छोटा लोटा
- चम्मच
- कुशा
- साफ आसन
इन पांच चीजों के साथ आचमन की प्रक्रिया निभाई जा सकती है। अगर चम्मच और कुशा नहीं है, तो आप हाथ से भी आचमन की प्रक्रिया कर सकते हैं।
आचमन करने की सही विधि
सबसे पहले स्नान करके या हाथ-पैर धोकर साफ वस्त्र पहनें। फिर किसी साफ स्थान पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठ जाएं। मन को शांत करें और भगवान का स्मरण करें।
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अब दाहिने हाथ की अंजुली में थोड़ा-सा जल लें। इसके बाद नीचे दिए गए मंत्रों के साथ तीन बार थोड़ा-थोड़ा जल ग्रहण करें।
- पहली बार जब आचमन करें, तो 'ॐ केशवाय स्वाहा' बोलें।
- जब दूसरी बार आचमन करें तब 'ॐ नारायणाय स्वाहा'
- तीसरी बार आचमन करने पर 'ॐ माधवाय स्वाहा' बोलें।
आचमन करने के स्टेप्स
- इसके बाद दाहिने हाथ में थोड़ा जल लेकर दोनों हाथों के अंगूठे और तर्जनी के मूल भाग का स्पर्श करें।
- फिर जल लेकर सभी उंगलियों के अग्रभाग को स्पर्श करें और "ॐ विष्णवे नमः" का स्मरण करें।
- इसके बाद दोनों हथेलियों को स्पर्श करते हुए "ॐ मधुसूदनाय नमः" बोलें।
- अंत में थोड़ा जल लेकर अपने सिर के ऊपर या मस्तक पर स्पर्श करें और बचा हुआ जल भूमि पर छोड़ दें। इसके बाद भगवान की पूजा की शुरुआत करें।
आचमन करने से मिलने वाले शुभ फल
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आचमन करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। व्यक्ति के अंदर सकारात्मक सोच का विकास होता है और मन शांत रहता है। ऐसा भी माना जाता है आचमन करने के बाद आप मन लगाकर पूजा कर पाते हैं।
अत: पूजा से पहले आचमन करना बहुत जरूरी है। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मन, वाणी और शरीर की पवित्र करने का एक तरीका है।
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