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    Holika Dahan 2026: होलिका दहन में क्यों जरूरी है पुराने सामान और उपलों की आहुति?

    Updated: Thu, 26 Feb 2026 11:11 AM (IST)

    होलिका दहन (Holika Dahan 2026) को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं, आइए उनके बारे में जानते हैं। ...और पढ़ें

    Holika Dahan 2026: होलिका दहन के नियम। (Ai Generated Image)

    Holika Dahan 2026: होलिका दहन के नियम। (Ai Generated Image)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेक्स, नई दिल्ली। होली का त्योहार केवल रंगों और खुशियों का मिलन नहीं है, बल्कि यह नई शुरुआत व पवित्रता का भी पर्व है। रंगों वाली होली से ठीक एक रात पहले होलिका दहन (Holika Dahan 2026) किया जाता है। इस अग्नि में पुराने सामान, सूखे पत्तों और विशेष रूप से गोबर के उपलों को अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों किया जाता है? तो आइए इसके पीछे की वजह को जानते हैं।

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    Ai Generated Image

    नकारात्मकता का अंत और नई शुरुआत

    होलिका दहन की अग्नि को बहुत पावन माना जाता है, जो बुराइयों का अंत करती है। घर का पुराना सामान, जैसे पुरानी लकड़ियां या टूटी-फूटी चीजें, हमारे अतीत का प्रतीक हैं। इन्हें अग्नि में समर्पित करने का मतलब है कि हम अपने जीवन से पुरानी कड़वाहट, आलस्य और नकारात्मक ऊर्जा को जलाकर नए उत्साह के साथ आगे बढ़ रहे हैं। यह एक तरह से नई शुरुआत का भी प्रतीक है।

    गोबर के उपलों का महत्व

    होलिका दहन में गाय के गोबर से बने छोटे-छोटे उपलों की माला चढ़ाना बहुत जरूरी होता है। धार्मिक मान्यता है कि ये उपले भक्त प्रह्लाद की रक्षा और होलिका के अहंकार के दहन का प्रतीक हैं। कहा जाता है कि घर की सुख-समृद्धि के लिए परिवार के हर सदस्य के नाम का एक-एक उपला अग्नि में डाला जाता है, जिसे 'सुरक्षा कवच' माना जाता है।

    वैज्ञानिक वजह

    होली का समय ऋतु परिवर्तन का होता है। इस दौरान हवा में बैक्टीरिया और हानिकारक कीटाणुओं की संख्या बढ़ जाती है, जिससे बीमारियां फैलने का डर रहता है। जब गाय के गोबर के उपले, कपूर, घी और सूखी लकड़ियां एक साथ जलती हैं, तो उनसे निकलने वाला धुआं कीटनाशक का काम करता है, जिससे हवा में शुद्धता फैलती है।

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    पवित्रता

    प्राचीन काल में होली के बहाने पूरे गांव और घरों की सफाई की जाती थी। सर्दियों के दौरान जमा हुआ कूड़ा व बिना जरूरत का सामान इकट्ठा कर एक जगह जला दिया जाता था। इससे न केवल गंदगी दूर होती थी, बल्कि पवित्रता भी बनी रहती थी।

    सावधानी बरतें

    • इस दौरान पुराने सामान के नाम पर प्लास्टिक, रबर या सिंथेटिक चीजें अग्नि में न डालें।
    • इस पवित्र अग्नि के आस-पास गंदा न करें।
    • इसमें तामसिक चीजें गलती से भी न डालें।

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    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।