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शादी में क्यों होती है द्वार रुकाई की रस्म? हंसी-मजाक के पीछे छिपी ये बड़ी वजह

Published: Tue, 22 Sep 2026 07:00 AM (IST)

हिंदू धर्म में शादी के बाद नई दुल्हन के घर आने पर 'द्वार रुकाई' की रस्म निभाई जाती है, जहाँ ...और पढ़ें

क्या है शादी में द्वार रुकाई की रस्म? (AI-Generated Image)

क्या है शादी में द्वार रुकाई की रस्म? (AI-Generated Image)

HighLights

  1. द्वार रुकाई रस्म पारिवारिक स्नेह और अधिकारों की सुंदर अभिव्यक्ति है।

  2. यह भाई को पारिवारिक रिश्तों और बहनों के प्रति स्नेह याद दिलाती है।

  3. रस्म भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में मिठास बनाए रखती है।

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शादी के दौरान की जाने वाली रस्मों का बहुत महत्व है। विवाह के समय रस्में निभाने का रिवाज प्राचीन समय से चला आ रहा है। वर्तमान में भी इन रस्मों को विशेष महत्व दिया जाता है। इन्हीं रस्मों में से एक है 'द्वार रुकाई की रस्म'।

जब शादी के बाद दूल्हा अपनी दुल्हन को लेकर घर आता है, तो मुख्य द्वार पर दूल्हे की बहनें दरवाजे को घेरकर खड़ी हो जाती हैं और दूल्हे-दुल्हन का रास्ता रोक लेती हैं, जिसे शादी में द्वार रुकाई की रस्म कहा जाता है। इस दौरान बहनें नवदंपति से मनचाहे नेग की मांग करती हैं।

अब यह जानकर आपके मन में सवाल आ रहा होगा कि शादी में द्वार रुकाई की रस्म क्यों होती है और बहनें अपने भाई का रास्ता क्यों रोकती हैं? ऐसे में आइए इस आर्टिकल में एस्ट्रोपत्री के श्री चंद्रेश शर्मा जी के अनुसार इस रस्म के पीछे की वजह जानते हैं।

श्री चंद्रेश शर्मा जी बताते हैं कि भारतीय विवाह परंपरा में द्वार रुकाई की रस्म केवल हंसी-मजाक नहीं, बल्कि पारिवारिक स्नेह और अधिकारों की एक सुंदर और गहरी अभिव्यक्ति है।

रस्म का सांकेतिक और आध्यात्मिक महत्व

कर्तव्य का स्मरण: जब दूल्हा अपनी दुल्हन के साथ गृह प्रवेश करता है, तो बहनें मुख्य द्वार पर रास्ता रोकती हैं। इसका अर्थ भाई को यह याद दिलाना है कि नए जीवनसाथी के आने के बाद भी वह पारिवारिक रिश्तों और बहनों के प्रति अपने स्नेह को न भूले।
शगुन और वचन: इस मीठी नोक-झोक के बदले भाई अपनी बहनों को उपहार या शगुन देकर उनका सम्मान करता है और जीवन भर उनके प्रति अपना दायित्व निभाने का वचन दोहराता है।
रिश्तों में मिठास: यह परंपरा भाई-बहन के पवित्र रिश्ते में मिठास बनाए रखती है और नए जीवन की शुरुआत को मंगलमय बनाती है।

बहुत ही खास है यह रस्म

इस रस्म में दूल्हे की बहनें दरवाजे को घेरकर खड़ी हो जाती हैं और नेग की मांग करती हैं। इस दौरान बहनें अपनी नई भाभी और भाई से हंसी-ठिठोली करती हैं। साथ ही कई तरह के गीत भी गाए जाते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये गीत नई बहू और दूल्हे से ही संबंधित होते हैं।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।