Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    सावन में कढ़ी खाने की क्यों होती है मनाही? सिर्फ परंपरा नहीं, पीछे छिपा है ये गहरा रहस्य

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 08:10 PM (IST)

    सावन में कढ़ी और दही से बनी चीजें खाने की मनाही क्यों होती है? जानिए इस पुरानी परंपरा के पीछे छिपे धार्मिक, आयुर्वेदिक और सेहत से जुड़े मुख्य कारण। ...और पढ़ें

    सावन के महीने में कढ़ी न खाने का कारण (AI-Generated Image)

    सावन के महीने में कढ़ी न खाने का कारण (AI-Generated Image)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सावन का महीना आते ही हमारे घरों में पूजा-पाठ के साथ-साथ खान-पान के भी कई नियम बदल जाते हैं। इसी में से एक नियम है सावन के पूरे महीने कढ़ी न खाना। अक्सर आपने सुना होगा कि घर के बड़े-बुजुर्ग इस मौसम में कढ़ी बनाने या खाने से साफ मना करते हैं। पहली नजर में यह बात सिर्फ एक पुरानी सोच लग सकती है, लेकिन इसके पीछे गहरा धार्मिक, आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक रहस्य छिपा हुआ है।

    धार्मिक मान्यता क्या कहती है?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दौरान महादेव का कच्चे दूध और दही से जलाभिषेक किया जाता है। सनातन परंपरा में माना गया है कि जो वस्तुएं भगवान के पूजन और अभिषेक में मुख्य रूप से इस्तेमाल की जाती हैं, उस समय उनका खुद सेवन करने से बचना चाहिए। कढ़ी खट्टे दही से तैयार होती है, इसलिए इस पवित्र महीने में इसे न खाने की परंपरा चली आ रही है।

    इसके अलावा, सावन संयम और सात्विक जीवन का समय होता है, जिसमें भारी और खट्टा भोजन मन को भटका सकता है। बड़े-बुजुर्ग इसी वजह से इसका सेवन करने की इजाजत नहीं देते थे।

    आयुर्वेद के अनुसार सेहत पर असर

    आयुर्वेद में बारिश के मौसम को सेहत के लिहाज से काफी संवेदनशील माना गया है। मानसून के दौरान हमारी पाचन शक्ति काफी धीमी हो जाती है। कढ़ी बनाने में खट्टे दही और बेसन का भारी मेल होता है, जिसे पचाना पेट के लिए बहुत मुश्किल होता है। इस मौसम में कढ़ी खाने से पेट में गैस, एसिडिटी और जोड़ों में दर्द यानी 'वात दोष' बढ़ने की आशंका रहती है। इसलिए कढ़ी न खाने की एक वजह से भी बताई जाती है।

    वैज्ञानिक कारण भी है बेहद मजबूत

    अगर आप वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो सावन में लगातार बारिश होने से वातावरण में नमी बढ़ जाती है। इस वजह से जगह-जगह कीड़े-मकोड़े और सूक्ष्मजीव पनपने लगते हैं। मवेशी जब बाहर चरते हैं, तो इस नमी और घास का असर उनके दूध पर भी पड़ता है। कढ़ी दही से बनती है, इसलिए उसमें भी संक्रमण की संभावना बनी रहती है।

    खबरें और भी

    दही की तरह सावन के दौरान हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे साग भी खाने के लिए मना किया जाता है। इस पूरे महीने लोग व्रत-उपवास रखते हैं, जिससे तामसिक भोजन से भी दूरी बनाई जाती है।

    यह भी पढ़ें- 7 अगस्त को बुधदेव का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश: इन 6 राशियों के करियर, व्यापार और धन में दिखेंगे बड़े बदलाव

    यह भी पढ़ें- सावन में घर लाएं तुलसी का पौधा, कोसों दूर भागेगी निगेटिविटी, सही दिशा और नियम नोट करें

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।