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किसी भी आरती के बाद 'कर्पूर गौरम' मंत्र क्यों पढ़ा जाता है, इसका महत्व क्या है?

Updated: Sun, 16 Aug 2026 12:19 PM (IST)

आरती के बाद 'कर्पूर गौरम' मंत्र का जाप भगवान शिव की स्तुति और भय से मुक्ति के लिए किया जाता ...और पढ़ें

आरती के बाद क्यों पढ़ते हैं 'कर्पूर गौरम' मंत्र जानें इसका महत्व और लाभ (Picture Credit: AI Generated)

आरती के बाद क्यों पढ़ते हैं 'कर्पूर गौरम' मंत्र जानें इसका महत्व और लाभ (Picture Credit: AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। आपने अक्सर देखा होगा कई मंदिर या घर में आरती समाप्त होने के बाद एक विशेष मंत्र 'कर्पूर गौरम' का जाप किया जाता है। हम सभी किसी भी यज्ञ या हवन के समापन के बाद आरती करते हैं और उसके बाद इस मंत्र को पढ़ना अनिवार्य माना जाता है।

हिंदू धर्म में न जाने कितने मंत्रों के बारे में बताया जाता है और इन सभी का अपना अलग महत्व भी होता है। असा कहा जाता है कि सभी मंत्रों के जाप में अलग शक्ति होती है और इके जाप से भी अलग लाभ होते हैं।

ये सभी मंत्र शरीर के साथ मन को भी स्वस्थ रखते हैं। इन्हीं मंत्रों में से एक भगवान शिव का प्रिय मंत्र 'कर्पूर गौरम करुणावतारं' भी है। इसके जाप से व्यक्ति को कई तरह के लाभ मिलते हैं। इस मंत्र का जाप किसी भी आरती के बाद क्यों किया जाता है। आइए जानें इसके बारे में यहां विस्तार से।

आरती के बाद क्यों पढ़ा जाता है 'कर्पूर गौरम'

हिंदू धर्म में श्रद्धालु मंदिरों में या अपने घरों में होने वाले दैनिक पूजा स्थान में किसी भी देवी देवताओं की आरती पूर्ण होने के बाद वैदिक मंत्रों का उच्चारण जरूर करते हैं। सभी देवी-देवताओं की स्तुति के मंत्र भी अलग-अलग हैं, लेकिन किसी भी आरती के पूर्ण होते ही एक दिव्य और अलौकिक मंत्र बोला जाता है। वह मंत्र हैं-

'कर्पूरगौरम करुणावतारम संसारसारं भुजगेंद्रहारम सदावसंतम हृदयारविंदे भवम भवानी सहितं नमामि' इस मंत्र का विशेष महत्व इसलिए होता है क्योंकि इस अलौकिक मंत्र के प्रत्येक शब्द में भगवान शिवजी की स्तुति की गई है इसका अर्थ होता है- कर्पूर गौरम- कपूर के समान गौर वर्ण वाले। करुणावतारं-करुणा के जो साक्षात् अवतार है, संसारसारं- समस्त सृष्टि के जो सार हैं, भुजगेंद्रहारम-यह सांप को हार के रूप में धारण करते हैं, सदावसंतम हृदयारविंदे भवम भवानी सहितं नमामि-यानि जो शिव-पार्वती के साथ सदैव मेरे हृदय में निवास करते हैं उनको मैं नमन करता हूं। इस मंत्र को आरती के बाद पढ़ने का विशेष महत्व होता है। किसी भी आरती के बाद इस मंत्र को पढ़ने का मतलब है शिव जी की स्तुति करना और उनसे भय से मुक्ति का आशीर्वाद लेना। इसी वजह से भक्त किसी भी भय से मुक्ति के लिए आरती के बाद शिव जी की स्तुति इस मंत्र के जरिए करते हैं।

आरती के बाद यह मंत्र पढ़ने का महत्व क्या है?

किसी भी आरती के बाद आप जब यह मंत्र पढ़ते हैं तो जीवन में अहंकार का नाश होता है। इस मंत्र से आपको किसी भी बाधा से मुक्ति मिलती है।

शिव-शक्ति की आराधना के लिए भी यह मंत्र महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मंत्र के जाप से किसी भी पूजा को पूर्णता मिलती है। इसी वजह से यह मंत्र आरती के बाद पूजा की पूर्णता के लिए ईश्वर का आह्वाहन माना जाता है। इसे अत्यंत फलदायी और किसी भी समस्या से बाहर आने का मूल मंत्र भी कहा जाता है। इसी वजह से जब आप यह मंत्र पढ़ते हैं तो आपको मानसिक शांति के साथ शारीरिक शक्ति भी मिलती है।

अगर आप भी इस मंत्र का नियमित जाप करते हैं तो ये जीवन में आने वाली किसी भी बड़ी समस्या से आपको बचाने में मदद करता है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण अंधविश्वास के खिलाफ है।