विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

आरती के बाद सीधे न उठें, जानिए पूजा के अंत में क्यों जरूरी है 'क्षमा प्रार्थना'?

Updated: Thu, 13 Aug 2026 03:15 PM (IST)

सनातन परंपरा में पूजा के अंत में क्षमा प्रार्थना का विशेष महत्व है। यह लेख क्षमायाचना मंत्र और इसे करने ...और पढ़ें

क्या आप भी पूजा के अंत में करते हैं ये काम? (AI-generated Image)

क्या आप भी पूजा के अंत में करते हैं ये काम? (AI-generated Image)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन परंपरा में पूजा केवल दीपक जलाने, फूल चढ़ाने या आरती कर लेने तक ही सीमित नहीं है। इसमें मंत्र, ध्यान, संकल्प और सच्ची श्रद्धा के साथ भगवान के सामने खुद को समर्पित करने का बड़ा गहरा महत्व है। अक्सर हम पूजा पूरी करने के बाद सीधे उठ जाते हैं, लेकिन हमारी धार्मिक परंपराओं में पूजा के अंत में क्षमायाचना करने का नियम बताया गया है।

इसका सीधा-सा मतलब यह है कि पूजा के दौरान जाने-अनजाने में हमसे जो भी कमी या भूल हो गई हो, उसके लिए भगवान के सामने हाथ जोड़कर विनम्रता से माफी मांग ली जाए। शास्त्रों के अनुसार, पूजा खत्म करने से पहले क्षमा प्रार्थना जरूर करनी चाहिए, ताकि हमारी पूजा अधूरी न रह जाए।

क्या है क्षमायाचना मंत्र?

पूजा के अंत में बोला जाने वाला सबसे प्रचलित क्षमायाचना मंत्र इस प्रकार है:

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं जनार्दन।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥

इस मंत्र का अर्थ

"हे ईश्वर! मुझे न तो आपको बुलाने (आवाहन) का सही तरीका पता है और न ही विदा (विसर्जन) करने का। मुझे पूजा करने की सही विधि भी नहीं आती। मैं मंत्रों के ज्ञान, सही क्रियाओं और सच्ची भक्ति से पूरी तरह विहीन हूं। इसके बावजूद मैंने अपनी समझ के अनुसार जो भी पूजा की है, हे जनार्दन! आप मेरी उस सेवा को स्वीकार करें, उसमें रही कमियों को पूरा करें और मेरी हर भूल को क्षमा करें।"

पूजा के अंत में क्षमा कैसे मांगें?

  • जब आपकी आरती या मुख्य पूजा पूरी हो जाए, तो हाथ में थोड़े से अक्षत (चावल) और फूल लें।
  • इसके बाद आंखें बंद करके शांत मन से भगवान का ध्यान करें।
  • मन ही मन अपनी कमियों और गलतियों को स्वीकार करते हुए इस क्षमायाचना मंत्र को पढ़ें।
  • मंत्र पढ़ने के बाद फूल और अक्षत भगवान के चरणों में अर्पित कर दें और झुककर प्रणाम करें।

शास्त्रों में भी कहा गया है कि भगवान भाव के भूखे हैं। आपके महंगे चढ़ावे या कठिन मंत्रों से ज्यादा वो आपकी विनम्रता को देखते हैं। क्षमायाचना का यह भाव हमें अपनी गलतियों को स्वीकार करना और अहंकार छोड़ना सिखाता है। इसलिए, अगली बार जब भी घर में पूजा करें, तो अंत में दो मिनट निकालकर क्षमा प्रार्थना जरूर करें।

यह भी पढ़ें- सावन विशेष: शिव पूजा में भूलकर भी न करें 10 गलतियां, वरना नहीं मिलेगा पूजा का फल!

यह भी पढ़ें- तीज की पूजा में कलश रखते समय भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, जानें स्थापना का सही तरीका

अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।