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Sawan 2026: सावन में क्यों खास है शिव पूजा? जानें जलाभिषेक की पौराणिक कथा और इकोत्तरनाथ धाम का महत्व

Updated: Wed, 12 Aug 2026 07:31 PM (IST)

सावन माह में शिव पूजा का विशेष महत्व है, जिसमें जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पण मुख्य हैं। समुद्र मंथन और माता ...और पढ़ें

घुंघचाई का इकोत्तरनाथ मंदिर। जागरण

घुंघचाई का इकोत्तरनाथ मंदिर। जागरण 

HighLights

  1. समुद्र मंथन से पार्वती की तपस्या तक जुड़ी हैं कथाएं

संवाद सूत्र, घुंघचाई (पीलीभीत)। सावन की पहली फुहार पड़ते ही प्रकृति शिवमय हो जाती है। पेड़ों पर हरियाली, खेतों में लहलहाती फसल, बारिश की रिमझिम और मंदिरों में गूंजता हर-हर महादेव। सावन केवल पंचांग का महीना नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए भोलेनाथ से जुड़ने का पवित्र अवसर है। इस पूरे माह शिवालयों में जलाभिषेक, बेलपत्र, धतूरा अर्पण, व्रत और कांवड़ यात्रा का सिलसिला चलता है। सावन के सोमवार को भोर से ही शिवालयों में श्रद्धालुओं की कतार लग जाती है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने सृष्टि बचाने के लिए कंठ में धारण किया। विष की जलन से बचाने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया। इसी से सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक की परंपरा जुड़ी। मान्यता है कि इस माह जल चढ़ाने से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

दूसरी कथा माता पार्वती की तपस्या से जुड़ी है। कहा जाता है पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें स्वीकार किया। इसलिए सावन को शिव-पार्वती मिलन का प्रतीक भी माना जाता है। भक्त मानते हैं इस माह पूजा से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है।

सोमवार भगवान शिव को विशेष प्रिय है। सावन के सोमवार को श्रद्धालु सूर्योदय से पूर्व स्नान कर गंगाजल, दूध, दही, शहद और बेलपत्र अर्पित करते हैं। बेलपत्र की तीन पत्तियां त्रिशूल और त्रिदेव की प्रतीक मानी जाती हैं।

इसी के साथ सड़कों पर कांवड़ियों के जत्थे निकल पड़ते हैं। पवित्र नदियों से जल लाकर पैदल शिवालयों तक पहुंचते हैं। बारिश और कठिन रास्ते भी आस्था नहीं डिगा पाते। बोल बम के जयघोष से पूरा माहौल शिवमय हो जाता है।

इकोत्तरनाथ में उमड़ती आस्था

घुंघचाई क्षेत्र का प्राचीन बाबा इकोत्तरनाथ मंदिर सावन में आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। गोमती नदी के तट और जंगल के बीच स्थित इस शिवधाम में सुबह से श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है। कोई गंगाजल तो कोई बेलपत्र-फूल लेकर पहुंचता है।

घंटियों की ध्वनि और हर-हर महादेव के बीच जलाभिषेक होता है। मंदिर तक का रास्ता कठिन होने के बावजूद श्रद्धालुओं की भीड़ कम नहीं होती। सावन के सोमवार को यहां उमड़ने वाली भीड़ बताती है कि पीढ़ियां बदल गईं, पर आस्था वही है।

प्रकृति भी बनती है शिवमय

सावन का धार्मिक महत्व जितना गहरा है, प्रकृति से जुड़ाव भी उतना ही सुंदर है। वर्षा से धरती को राहत, सूखे पेड़ों में नई जान और खेतों में हरियाली आती है। घुंघचाई के ग्रामीण अंचल में धान-गन्ने के खेतों के बीच बहती हवा, बारिश की फुहार और दूर शिवालय से आती घंटियों की आवाज सावन को अनुभूति बना देती है।

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