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तीज की पूजा में कलश रखते समय भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, जानें स्थापना का सही तरीका

Updated: Wed, 12 Aug 2026 07:52 PM (IST)

हरियाली तीज 2026 पर कलश स्थापना का विशेष महत्व है। पूजा में कलश रखते समय की गई छोटी गलतियां व्रत ...और पढ़ें

हरियाली तीज पूजा में कलश स्थापना । (Picture Credit- AI Generated)

हरियाली तीज पूजा में कलश स्थापना । (Picture Credit- AI Generated)

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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। 15 अगस्‍त को हरियाली तीज है। महिलाओं के बीच यह त्‍योहार बहुत लोकप्रिय है। पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्‍य पाने के लिए इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं।

हरियाली तीज की पूजा में कलश स्‍थापना का भी महत्‍व है, मगर अक्‍सर महिलाएं कलश स्‍थापना करते वक्‍त गलतियां कर बैठती हैं, जिनसे बचना चाहिए। चलिए हम आपको इन गलतियों के बारे में बताते हैं।

अशुद्ध स्‍थान का चुनाव

पूजा और कलश स्‍थापना के लिए हमेशा साफ स्‍थान का ही चुनाव करें। यह स्‍थान मुख्‍य द्वार के पास नहीं होना चाहिए और न ही बाथरूम के पास। पूजा और कलश स्‍थापना से पूर्व स्‍थान को साफ भी कर लें।

गलत दिशा में कलश स्‍थापना

केवल ईशान कोण में कलश की स्‍थापना करनी चाहिए। कई बार लोग गलत दिशा में कलश स्‍थापना करते हैं, जिससे पूजा अपूर्ण रह जाती है।

कलश में गंदा पानी भरना

कलश के अंदर साफ और ताजा पानी ही भरें। यदि आप कलश में पुराने भरे पानी के साथ ही उसे स्‍थापित कर देते हैं, तो यह पूजा को अशुद्ध बनाता है।

खंडित नारियल का प्रयोग

कलश के ऊपर रखा जाने वाला नारियल भी साबुत होना चाहिए। कई लोग नारियल के सूखे गोले को रख लेते हैं, जो गलत है। सूखे गोले का प्रयोग केवल हवन के दौरान होता है। इस बात का भी ध्‍यान रखें कि नारियल के अंदर पानी हो, नारियल अंदर से सूखा नहीं होना चाहिए।

सूखे आम के पत्‍तों का प्रयोग

कलश में आम या अशोक के पत्‍तों को रखा जाता है। इसके लिए ताजे पत्‍तों का इस्‍तेमाल करना चाहिए, सूखे और बासी पत्‍तों का इस्‍तेमाल करने से पूजा का फल नहीं मिलता है।

प्‍लास्टिक का कलश

भूल से भी तीज की पूजा के लिए कलश स्‍थापना के वक्‍त प्‍लास्टिक का कलश न लें। पूजन में केवल स्‍टील, तांबे या पीतल का कलश ही प्रयोग किया जाता है। सबसे अच्‍छा होगा कि आप पीतल के कलश को ही स्‍थापना में रखें।

कलश का स्‍थान बदलना

कलश स्थापना के बाद आपको जहां कलश रखा है, वहीं उसकी पूजा करनी है और उसी स्थान पर कलश को रखे रहने देना है। कलश का स्थान बार-बार बदलना सही बात नहीं होती।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है