Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    महाभारत का रहस्य: जब कई ज्ञानी मौजूद थे, तब श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ही गीता का ज्ञान क्यों दिया?

    Updated: Tue, 20 Jan 2026 11:30 AM (IST)

    अर्जुन कर्मयोग का प्रतीक था। वह युद्ध से भागना नहीं चाहता था, बल्कि सही तरीके से युद्ध करना चाहता था। श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान उसी को दिया, जो प्रश् ...और पढ़ें

    महाभारत का गहरा रहस्य (Image source: AI-Generated)

    महाभारत का गहरा रहस्य (Image source: AI-Generated)

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    धर्म डेस्क, नई दिल्ली। महाभारत के युद्ध से पहले कुरुक्षेत्र में एक ऐसा क्षण आया, जिसने न सिर्फ युद्ध की दिशा बदली बल्कि पूरी मानवता को जीवन का मार्ग दिखा दिया। सवाल आज भी लोगों के मन में उठता है, जब पांडवों की ओर भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य जैसे महान ज्ञानी मौजूद थे, तो श्रीकृष्ण ने अर्जुन को ही गीता का उपदेश क्यों दिया?

    असल में अर्जुन उस समय सिर्फ एक योद्धा नहीं था, बल्कि एक असहाय मन का प्रतीक था। युद्धभूमि में खड़े होकर अर्जुन ने अपने ही लोगों को सामने देखा- गुरु, पितामह, भाई, मित्र। उसका धनुष गिर गया, शरीर कांपने लगा और मन में प्रश्न उठने लगे। यही वह स्थिति थी जिसे गीता में विषाद योग कहा गया।

    गीता का ज्ञान उपदेश नहीं- संवाद

    श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान उसी को दिया, जो प्रश्न करने का साहस रखता था। अर्जुन जानना चाहता था कि धर्म क्या है, कर्म क्या है और सही रास्ता कौन सा है। गीता का ज्ञान उपदेश नहीं, संवाद है, और संवाद वहीं संभव होता है जहां जिज्ञासा हो।

    Arjun Mahabharat

    (Image Source: AI-Generated)

    भीष्म और द्रोण जैसे ज्ञानी अपने-अपने संकल्पों और प्रतिज्ञाओं से बंधे थे। वे जानते हुए भी परिस्थिति बदल नहीं पा रहे थे। वहीं अर्जुन खुला हुआ मन लेकर खड़ा था- न अहंकार, न ज्ञान का दंभ। यही कारण था कि श्रीकृष्ण ने उसे गीता का पात्र चुना।

    खबरें और भी

    यह भी है गहरा रहस्य

    एक और गहरा रहस्य यह भी है कि अर्जुन कर्मयोग का प्रतीक था। वह युद्ध से भागना नहीं चाहता था, बल्कि सही तरीके से युद्ध करना चाहता था। श्रीकृष्ण ने उसे सिखाया कि कर्म करो, फल की चिंता छोड़ दो- यही गीता का सार है। इसलिए गीता अर्जुन को दी गई, क्योंकि वह हर उस इंसान का प्रतिनिधि था जो जीवन में कभी न कभी द्वंद्व, भय और भ्रम से गुजरता है। महाभारत का यह रहस्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है, क्योंकि अर्जुन हम सब के भीतर मौजूद है।

    यह भी पढ़ें- Mahabharat Katha: इस कथा से जानें, क्यों कर्ण का सबसे बड़ा पुण्य ही उसकी हार का आधार बना

    यह भी पढ़ें- Mahabharata: अर्जुन ने क्यों किया था बड़े भाई युधिष्ठिर का अपमान? श्रीकृष्ण ने ऐसे बचाई पांडवों की लाज

    अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।