कृष्ण ने गोपियों के वस्त्र क्यों चुराए थे? श्रीमद्भागवत में लिखा है मुरलीधर की इस लीला का रहस्य
श्रीमद्भागवत में वर्णित है कि कैसे भगवान कृष्ण ने यमुना में स्नान करती गोपियों के वस्त्र चुराए थे। इस लीला ...और पढ़ें

श्रीकृष्ण ने गोपियों के वस्त्र चुराए: इस लीला का वास्तविक अर्थ (Picture Credit: AI Generated)
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गोपियों का यमुना में निर्वस्त्र स्नान शास्त्रों के विरुद्ध था।
कृष्ण ने उन्हें मर्यादा और वरुणदेव के सम्मान का पाठ सिखाया।
यह लीला कृष्ण और गोपियों के अद्भुत रिश्ते को दर्शाती है।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। कृष्ण की लीलाओं की बात करें तो जन्म से ही उन्होंने कुछ ऐसे चमत्कार दिखाने शुरू कर दिए थे जो उनके भक्तों को आज भी सम्मोहित करते हैं।
कभी कालिया नाग के ऊपर नृत्य करना, तो कभी पूतना का वध करना, कभी गोपियों की मटकी फोड़कर माखन चुराना, तो कभी माता यशोदा को मुंह के अंदर पूरे ब्रह्माण्ड के दर्शन करा देना।
वास्तव में द्वापर युग में श्री कृष्ण की लीलाएं कुछ अलग ही रूप में आकर्षित करती हैं। श्री कृष्ण की लीलाओं में से एक थी नदी में स्नान करती हुई गोपियों के वस्त्र चुराना।
श्रीमद्भागवत के दशम स्कंध में बताया गया है कि कैसे ग्वालों की विवाह-योग्य कन्याओं ने भगवान श्री कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए कात्यायनी देवी की पूजा की और कैसे कृष्ण ने उन युवतियों के वस्त्र यमुना नदी के पास से चुरा लिए और उन्हें मर्यादा का ज्ञान कराया। आइए आपको बताते हैं श्री कृष्ण की इस अद्भुत लीला का रहस्य।
कृष्ण के गोपियों के वस्त्र चुराने की कथा क्या है?
मार्गशीर्ष महीने में, रोज सुबह-सुबह गोपिकाएं एक-दूसरे का हाथ पकड़कर कृष्ण के दिव्य गुणों का गुणगान करते हुए यमुना नदी में स्नान करने जाती थीं।
वो सभी श्री कृष्ण को जीवनसाथी के रूप में पाने की इच्छा रखती थीं और वो नियमित रूप से धूप, फूल और अन्य सामग्रियों के साथ देवी कात्यायनी की पूजा करती थीं। एक दिन, युवा गोपियों ने हमेशा की तरह अपने वस्त्र स्नान करते समय यमुना नदी के किनारे छोड़ दिए और भगवान कृष्ण की लीलाओं का गुणगान करते हुए पानी में खेलने लगीं। तभी अचानक कृष्ण जी स्वयं वहां आए और उनके सारे वस्त्र उठाकर कदंब के पेड़ पर चढ़ गए।
गोपियों को चिढ़ाने के लिए कृष्ण ने कहा, कि वो नदी के किनारे आएं और अपने वस्त्र स्वयं ही ले लें। उस समय गोपियां निर्वस्त्र स्नान कर रही थीं, इसलिए वो नदी से बाहर नहीं आ सकती थीं। ऐसे में श्री कृष्ण ने गोपियों को इस अवस्था में देखकर कहा कि उन्होंने देवताओं का अपमान किया है, इसके प्रायश्चित के लिए उन्हें हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए।
कृष्ण ने क्यों चुराए थे गोपियों के वस्त्र
गोपियों के वस्त्र चुराने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह था कि गोपियां उस समय यमुना जैसी पवित्र नदी में निर्वस्त्र स्नान कर रही थीं, जो शास्त्रों के अनुकूल नहीं था।
कृष्ण जी इससे बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने गोपियों को सबक सिखाने के लिए ऐसा किया। उन्होंने गोपियों को बिना कपड़ों के नदी में स्नान करने के लिए मना किया और उनसे कहा कि उन्हें अपने पापों का प्रायश्चित करने के लिए अपने हाथ सिर पर रखने और जमीन पर झुककर प्रणाम करना होगा। गोपियां अपने इस कृत्य से शर्मिंदा थीं और उन्होंने वही किया जो कृष्ण ने कहा।
निर्वस्त्र स्नान जल के देवता का अपमान
कृष्ण जी ने गोपियों के वस्त्र इसलिए भी चुराए क्योंकि उनका निर्वस्त्र होकर स्नान करना जल के देवता वरुणदेव का अपमान करने जैसा था। कृष्ण जी गोपियों को इस बात का एहसास दिलाना चाहते थे कि गोपियों ने जो भी किया है उचित नहीं है।
यही नहीं गोपियां जिस अवस्था में स्नान कर रही थीं उस स्थान पर कोई भी उन्हें देख सकता था, जो ठीक नहीं था। कृष्ण जी गोपियों को यह संदेश देना चाहते थे कि वो मर्यादा में रहकर ही स्नान करें।
कृष्ण की लीलाओं में से खास थी यह लीला और इससे कृष्ण और गोपियों के अद्भुत रिश्ते को दिखाता है।
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